Iran Protests
Iran Protests: ईरान में महीनों से चल रहे देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और उन पर हुई सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद, तेहरान सरकार ने पहली बार मरने वालों का आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक किया है। सरकारी टेलीविजन पर गृह मंत्रालय और वेटरन्स मामलों की फाउंडेशन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अब तक कुल 3,117 लोगों की जान जा चुकी है। रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में मारे गए लोगों में से 2,427 आम नागरिक और सुरक्षा बल के जवान शामिल थे। हालांकि, शेष मौतों की श्रेणी और उनके बारे में विस्तृत जानकारी सरकारी बयान में स्पष्ट नहीं की गई है।
ईरान सरकार द्वारा जारी किए गए ये आंकड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के अनुमानों की तुलना में काफी कम हैं। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ (HRANA) ने गुरुवार सुबह तक कम से कम 4,902 मौतों की पुष्टि की है। यह संगठन ईरान के भीतर सक्रिय अपने नेटवर्क के माध्यम से हर मौत की गहन जांच करता है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सरकार असल संख्या को छुपा रही है। दूसरी ओर, ईरान की सरकारी मीडिया लगातार प्रदर्शनकारियों को अमेरिका और इजरायल द्वारा प्रायोजित ‘दंगाई’ करार दे रही है।
इस अशांति के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान पर फिर से हमला हुआ, तो उनका देश पूरी शक्ति के साथ पलटवार करेगा। यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब दावोस में आयोजित ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ ने ईरान का निमंत्रण रद्द कर दिया है। साथ ही, अमेरिकी विमानवाहक पोत (Air Craft Carrier) और फाइटर जेट्स का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना तेहरान के लिए खतरे की घंटी बन गया है।
HRANA की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 26,500 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। जानकारों का कहना है कि मौतों और गिरफ्तारियों की यह संख्या ईरान के दशकों के इतिहास में सबसे अधिक है, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति की याद दिलाती है। हालांकि, हाल के दिनों में बड़े प्रदर्शनों की गति कुछ धीमी हुई है, लेकिन देश में जारी ‘इंटरनेट शटडाउन’ के कारण सटीक जानकारी बाहर नहीं आ पा रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डर है कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को जल्दबाजी में फांसी दी जा सकती है, क्योंकि ईरान मृत्युदंड देने के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
ईरान के भीतर मचे कोहराम के बीच अब सीमा पार सैन्य कार्रवाई की खबरें भी आने लगी हैं। ‘कुर्दिस्तान नेशनल आर्मी’ ने दावा किया है कि ईरान ने बुधवार को इराक के इरबिल के पास स्थित उनके एक बेस पर हमला किया, जिसमें एक लड़ाका मारा गया। यदि इस हमले की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद यह ईरान का पहला विदेशी सैन्य ऑपरेशन होगा। उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र लंबे समय से ईरानी असंतुष्ट समूहों के ठिकाने रहे हैं, जो तेहरान और बगदाद के बीच हमेशा से तनाव का मुख्य केंद्र रहे हैं।
ईरान में जारी यह संकट केवल आंतरिक विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक गंभीर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का रूप ले लिया है। एक तरफ प्रदर्शनकारियों की बढ़ती मौतें और गिरफ्तारियां हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ युद्ध जैसी स्थिति। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि ईरान की सरकार इन प्रदर्शनों को दबाने में सफल होती है या यह अशांति किसी नए राजनीतिक बदलाव की नींव रखेगी।
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