Iran Israel Threat : इजरायल गाजा पर पूरी तरह से कब्जा करने की योजना बना रहा है। करीब ढाई लाख इजरायली सैनिक गाजा में कूच के लिए तैनात किए गए हैं। इसी बीच, ईरान ने इजरायल को चेतावनी दी है कि यदि उसने गाजा में कोई सैन्य अभियान चलाया तो इसका अंजाम बहुत गंभीर होगा। ईरान का यह स्पष्ट संदेश मध्य पूर्व में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति को और भड़काने वाला साबित हो सकता है।
इजरायल द्वारा गाजा पर जारी हमलों के कारण लाखों नागरिक प्रभावित और मारे जा चुके हैं। गाजा के हालात बेहद दयनीय हैं, जहां लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को लेकर कई अरब और यूरोपीय देशों ने कड़ी निंदा की है। फ्रांस और ब्रिटेन ने भी इजरायल के कड़े हमलों की आलोचना करते हुए कहा है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता तो वे फलस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का निर्णय ले सकते हैं।
फिर भी, इन अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का इजरायल पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में इजरायली सेना गाजा पर कब्जा करने की तैयारियों में जुटी हुई है। वे गाजा के किनारे खड़े हैं और आदेश मिलते ही सेना का कूच शुरू कर दिया जाएगा।
अटकलें लगाई जा रही हैं कि 15 अगस्त को अलास्का में होने वाली ट्रंप और पुतिन की बैठक के बाद नेतन्याहू अपने सैन्य अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। यह ऑपरेशन गाजा के दक्षिणी हिस्से में लगभग 75% आबादी को विस्थापित कर, वहां यहूदी बस्तियां बसाने की योजना के तहत होगा। इजरायल की यह योजना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
ईरान ने इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि गाजा में यहूदी बस्तियां बसाना स्वीकार्य नहीं होगा। यदि इजरायल ने अपने कदम वापस नहीं लिए तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। ईरान की यह धमकी मध्य पूर्व में एक बड़े सैन्य संघर्ष के खतरे को बढ़ा सकती है। साथ ही, अरब के अन्य देश भी इजरायल के इस कदम का विरोध कर रहे हैं और मानते हैं कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल ने अपनी योजना के अनुसार गाजा पर कब्जा किया, तो एक बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। यह युद्ध केवल स्थानीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में इसके व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
इजरायल की गाजा पर सैन्य कार्रवाई और ईरान की धमकियों के बीच मध्य पूर्व की स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निंदा के बावजूद इजरायल अपनी रणनीति पर अड़ा हुआ है, जबकि ईरान और अरब देश इसके खिलाफ कड़ा रुख अपना रहे हैं। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय शांति के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
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