Iran Unrest
Iran Unrest: ईरान में जारी व्यापक जन-आक्रोश और विरोध प्रदर्शनों के बीच वहां के रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अजीज नसीरजादे ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। 15 जनवरी 2026 को सरकारी मीडिया को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि देश में चल रहे प्रदर्शनों का मूल कारण आंतरिक नहीं, बल्कि विदेशी साजिश है। नसीरजादे के अनुसार, अमेरिका और इजरायल जैसी ताकतें ईरान को अस्थिर करने के लिए प्रदर्शनकारियों को हथियार, पैसा और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रही हैं। रक्षा मंत्री ने बताया कि एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिसे हत्याएं करने के लिए 900 मिलियन तोमन (लगभग 6,500 डॉलर) का भुगतान किया गया था।
ईरानी रक्षा मंत्री ने अपनी रिपोर्ट में एक बेहद गंभीर ‘रेट कार्ड’ का जिक्र किया, जिसके तहत हिंसक गतिविधियों के लिए पैसे बांटे जा रहे थे। नसीरजादे के दावों के अनुसार:
किसी व्यक्ति की हत्या: 500 मिलियन तोमन (करीब 3,500 डॉलर)।
कार फूंकना: 200 मिलियन तोमन।
पुलिस स्टेशन जलाना: 80 मिलियन तोमन।
अशांति फैलाना: 15 मिलियन तोमन। नसीरजादे ने तर्क दिया कि जब मौतों और आगजनी के लिए इतना पैसा दिया जा रहा हो, तो यह स्पष्ट है कि इन विरोध प्रदर्शनों का उद्देश्य सुधार नहीं बल्कि केवल अराजकता फैलाना है।
ईरान सरकार का कहना है कि कुरान जलाना और मस्जिदों पर हमले करना इस बात का सबूत है कि ये विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं बल्कि आतंकी उद्देश्यों से प्रेरित हैं। रक्षा मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दंगाइयों को हिंसा बढ़ाने के लिए ‘इंडस्ट्रियल ड्रग्स’ (सिंथेटिक ड्रग्स) दिए गए थे। उन्होंने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विरोध के कुछ नेताओं ने खुद अपने ही सदस्यों को करीब से गोली मारकर हत्याएं कीं, ताकि जनता में सुरक्षा बलों के प्रति गुस्सा पैदा किया जा सके। उनके मुताबिक, 60% मौतें सिर पर वार या गला घोंटने और ड्रग ओवरडोज के कारण हुई हैं।
ईरान में यह प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए थे, जो मूल रूप से महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ थे। हालांकि, सरकार इन्हें लगातार विदेशी साजिश करार दे रही है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने पूर्व में सैन्य कार्रवाई के संकेत भी दिए थे, लेकिन हालिया बयानों में उन्होंने कहा है कि हत्याओं की घटनाओं में कुछ कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय समुदायों ने ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट पर भी चिंता जताई है, जिसे सच्चाई छिपाने का जरिया माना जा रहा है।
जनरल नसीरजादे ने दावा किया कि ईरानी खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे सबूत हैं जिनसे पता चलता है कि अमेरिका, इजरायल और कुछ पश्चिमी देशों ने ईरान के पड़ोसी देशों में गुप्त बैठकें की हैं। इन बैठकों का एकमात्र एजेंडा ईरान में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देना और दंगों के लिए बजट बढ़ाना था। ईरान का कहना है कि यह एक सुनियोजित हमला है जिसे ‘हाइब्रिड वॉर’ के तहत अंजाम दिया जा रहा है। फिलहाल, देश में तनाव बरकरार है और सरकार अपनी सुरक्षा नीति को और सख्त कर रही है।
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