Iran-US Nuclear Talks: अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से चले आ रहे परमाणु गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी और सकारात्मक सुगबुगाहत देखी जा रही है। लंबे समय से जारी तनाव और कूटनीतिक ठंडे बस्ते के बाद, ईरान ने एक ऐसा संकेत दिया है जिसे विशेषज्ञ ‘गेम चेंजर’ मान रहे हैं। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख, मोहम्मद एस्लामी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा कि यदि तेहरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा लिया जाता है, तो ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के मौजूदा भंडार को कम करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर सकता है। यह प्रस्ताव परमाणु सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों के साथ चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि ईरान वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए ‘समान गंभीरता’ की आवश्यकता है। अराघची ने जोर देकर कहा कि पिछले कुछ दशकों में, विशेष रूप से परमाणु समझौते से अमेरिका के पीछे हटने के बाद, दोनों देशों के बीच अविश्वास की एक विशाल दीवार खड़ी हो गई है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि कोई भी सार्थक और परिणामोन्मुखी बातचीत दबाव, धमकियों या प्रतिबंधों के साये में नहीं हो सकती। यदि अमेरिका वार्ता में रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाता है, तभी अविश्वास की इस खाई को पाटा जा सकता है।
परमाणु वार्ता की सफलता के मार्ग में सबसे बड़ा पेंच यूरेनियम संवर्धन की सीमा और ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम है। वाशिंगटन का निरंतर यह तर्क रहा है कि किसी भी नए समझौते में केवल परमाणु मुद्दे ही नहीं, बल्कि ईरान की मिसाइल क्षमताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। पिछले साल हुई पांच दौर की बातचीत के विफल होने का एक प्रमुख कारण यही मांग थी। हालांकि, ईरान ने इस पर अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है। तेहरान का स्पष्ट मानना है कि उसकी रक्षा प्रणाली और मिसाइल कार्यक्रम गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) हैं और इन्हें परमाणु संधि का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।
वर्तमान में ओमान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी का आगामी ओमान दौरा इसी कड़ी का हिस्सा है। ओमान में हाल ही में संपन्न हुई प्रारंभिक और गोपनीय चर्चाओं ने इस उम्मीद को जीवित रखा है कि कूटनीति के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है। लारिजानी की यात्रा के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
ईरान का यूरेनियम भंडार कम करने का नया प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर प्रदान करता है। यदि अमेरिका और उसके सहयोगी देश प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमत होते हैं, तो यह मध्य-पूर्व में शांति की एक नई किरण साबित हो सकता है। हालांकि, अविश्वास और पुरानी शर्तों के कारण यह रास्ता अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पूरी दुनिया की नजरें अब ओमान में होने वाली अगली बैठकों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि क्या यह ‘सकारात्मक सुगबुगाहट’ एक ठोस समझौते में बदल पाएगी या नहीं।
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