अंतरराष्ट्रीय

Iran US Peace Talk : “बातचीत की मेज पर भी हार गया अमेरिका”, पीस टॉक फेल होने पर ईरान की दोटूक!

 Iran US Peace Talk :  वैश्विक राजनीति के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से प्रतीक्षित अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता आधिकारिक तौर पर असफल हो गई है। इस वार्ता के टूटने के लिए दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के अड़ियल रुख को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान की सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका द्वारा थोपी गई अत्यधिक मांगों और कड़ी शर्तों के कारण बातचीत का कोई सकारात्मक निष्कर्ष नहीं निकल सका। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने भी इस विफलता की पुष्टि की है। यह असफलता मध्य पूर्व में स्थिरता लाने की कोशिशों के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, जिससे क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच सकता है।

जेडी वेंस की दो टूक: समझौते की विफलता ईरान के लिए ‘बुरी खबर’

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एक सधा हुआ लेकिन कड़ा बयान दिया है। वेंस ने कहा, “ईरानियों के साथ हमारी कई महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं, जो कि एक अच्छी बात है। लेकिन बुरी खबर यह है कि हम किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं।” वेंस ने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस वार्ता का विफल होना अमेरिका से कहीं ज्यादा ईरान के लिए नुकसानदेह साबित होगा। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि उन्होंने ईरान को मुख्यधारा में लौटने का एक उचित अवसर दिया था, जिसे ईरान ने अपनी शर्तों के कारण गंवा दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु अधिकारों पर अटका मामला

बातचीत के विफल होने के पीछे कई जटिल रणनीतिक मुद्दे रहे हैं। ईरान का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका ने इतनी अधिक शर्तें रख दी थीं कि किसी भी समझौते के लिए बुनियादी ढांचा (फ्रेमवर्क) तैयार करना असंभव हो गया। मुख्य विवाद होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के नियंत्रण और ईरान के परमाणु अधिकारों को लेकर था। ईरान ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों में यह मांग की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसके पूर्ण नियंत्रण को वैश्विक मान्यता दी जाए और वहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से ‘ट्रांजिट शुल्क’ वसूलने का अधिकार उसे मिले। इसके अतिरिक्त, ईरान शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार को भी सुरक्षित रखना चाहता था, जिस पर अमेरिका सहमत नहीं हुआ।

ईरान का पलटवार: ‘जंग में जो नहीं मिला, वह मेज पर मांग रहा अमेरिका’

ईरान की समाचार एजेंसी ‘फ़ार्स न्यूज़’ ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सूत्रों के हवाले से अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। सूत्र का दावा है कि वाशिंगटन ने बातचीत की मेज पर वह सब कुछ हासिल करने की कोशिश की, जो वह युद्ध के मैदान में या दशकों के प्रतिबंधों के जरिए नहीं पा सका। ईरान का कहना है कि वे अपनी संप्रभुता और परमाणु ऊर्जा की जरूरतों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका की शर्तें उनके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ थीं, विशेषकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे सामरिक मार्ग पर नियंत्रण छोड़ने की बात ईरान को स्वीकार्य नहीं थी।

परमाणु हथियार: अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता और शर्त

वार्ता टूटने का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु परमाणु हथियार ही रहा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देना चाहता। उन्होंने कहा, “हमें ईरान की ओर से एक ऐसा पक्का और विश्वसनीय वादा चाहिए था कि वे भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेंगे।” अमेरिका की चिंता यह है कि ईरान शांतिपूर्ण ऊर्जा के नाम पर ऐसी तकनीक विकसित कर सकता है, जिससे वह बहुत ही कम समय में हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर ले। सुरक्षा के इसी ‘गारंटी क्लॉज’ पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई और दशकों पुराना यह गतिरोध एक बार फिर यथावत बना हुआ है।

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