Trump vs NATO
Trump vs NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), अब सभी अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह से खुल गया है। स्थिति इतनी तेजी से बदली है कि कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे अमेरिका और ईरान अब मिलकर काम कर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान अब अमेरिकी सेना के साथ सहयोग कर रहा है ताकि इस समुद्री मार्ग में बिछी हुई खतरनाक माइन्स (समुद्री सुरंगों) को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके। यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि इस मार्ग के बंद होने से पूरी दुनिया में ईंधन की किल्लत और आर्थिक संकट का खतरा मंडरा रहा था।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया कि ईरान इस बात पर पूरी तरह सहमत हो गया है कि वह भविष्य में कभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अब इस जलमार्ग का इस्तेमाल दुनिया के खिलाफ एक हथियार के तौर पर नहीं किया जाएगा।” यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। पिछले कई दशकों से ईरान इस मार्ग को बंद करने की धमकी देकर वैश्विक शक्तियों पर दबाव बनाता रहा है, लेकिन वर्तमान समझौते के बाद अब इस क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद जगी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक गतिविधियां अब बिना किसी बाधा के जारी रहेंगी।
होर्मुज स्ट्रेट की सफलता के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। ट्रंप ने नाटो की कार्यप्रणाली और उसकी प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जब होर्मुज में संकट सुलझ गया और स्थिति सामान्य होने लगी, तब नाटो की ओर से सहायता की पेशकश का फोन आया। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में उन्हें जवाब दिया और कहा कि उन्हें किसी सहायता की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने नाटो को ‘कागजी शेर’ (Paper Tiger) बताते हुए कहा कि जब वास्तव में उनकी आवश्यकता थी, तब वे कहीं नजर नहीं आए। ट्रंप का यह हमला नाटो देशों के साथ अमेरिका के तनावपूर्ण संबंधों को एक बार फिर उजागर करता है, जहाँ वे अक्सर सहयोगियों पर रक्षा बजट में कम योगदान देने का आरोप लगाते रहे हैं।
इस वैश्विक घटनाक्रम पर फ्रांस और ब्रिटेन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने शुक्रवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के निर्णय का स्वागत किया। हालांकि, दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इस मार्ग की सुरक्षा को केवल अस्थायी नहीं, बल्कि ‘स्थायी’ रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यूरोपीय नेताओं ने समुद्री सुरक्षा को बहाल करने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय मिशन की योजना पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। उनका मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए इस मार्ग की निगरानी के लिए एक ठोस अंतरराष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की यह घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लेबनान और इजरायल के बीच 10 दिनों के युद्धविराम के ऐलान के ठीक बाद आई है। मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में इन दोनों घटनाओं को जोड़कर देखा जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे अब क्षेत्र में आर्थिक विकास और शांति को प्राथमिकता देना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शांति बनी रहती है, तो इससे न केवल तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी स्थिरता लौटेगी। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और ईरान के साथ उनके अप्रत्याशित कूटनीतिक तालमेल ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल कर रख दिया है।
Women Reservation Bill : संसद के विशेष सत्र में उस समय एक ऐतिहासिक गतिरोध पैदा…
US Iran Tension 2026 : ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता…
Healthy Gut Summer : तपती गर्मी और उमस भरे मौसम का सबसे बुरा असर हमारे…
भारतीय काल गणना और हिंदू धर्मग्रंथों में अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है।…
World War Alert: "वैश्विक राजनीति में अपनी आक्रामक शैली के लिए पहचाने जाने वाले अमेरिकी…
Tech Report: भारतीय स्मार्टफोन बाजार, जो पिछले कई वर्षों से लगातार विकास की राह पर…
This website uses cookies.