Iran warning to USA
Iran warning to USA : मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्तों में कड़वाहट और आक्रामकता अपने चरम पर पहुंच गई है। ईरान के सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने अमेरिकी सेना को बेहद गंभीर और सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिकी सैनिकों ने ईरानी सरजमीं पर कदम रखने की जुर्रत की, तो उनमें से एक भी हमलावर जीवित वापस नहीं लौटेगा। ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक विशेष कार्यक्रम में हातामी ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने देश से युद्ध के साये को पूरी तरह हटाना चाहता है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि वे अपनी सुरक्षा से समझौता करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में शांति के लिए सभी की सुरक्षा सुनिश्चित होना अनिवार्य है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी सेना के ‘खातम अल-अंबिया’ केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फागरी ने तेहरान की सैन्य शक्ति का बखान किया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास हथियारों और गोला-बारूद के ऐसे गुप्त भंडार मौजूद हैं, जिनके बारे में पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को कोई भनक तक नहीं है। ज़ोल्फागरी ने अमेरिका को चुनौती देते हुए कहा कि वाशिंगटन जिन ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है, वे सामरिक रूप से महत्वहीन हैं। उनके अनुसार, ईरान का मुख्य रणनीतिक सैन्य उत्पादन उन गुप्त स्थानों पर होता है जहाँ तक अमेरिकी मिसाइलें कभी नहीं पहुँच पाएंगी।
इस त्रिकोणीय संघर्ष में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है। इजरायली सेना की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक ईरान और उसके समर्थित समूहों (प्रॉक्सी) के खिलाफ 4,000 से अधिक सामरिक ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। इनमें सैन्य अड्डे, मिसाइल लॉन्चिंग पैड और रसद केंद्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 10,000 से ज्यादा आतंकी ठिकानों को भी ध्वस्त करने का दावा किया गया है। हालांकि, हाल के दिनों में ईरान की ओर से होने वाले मिसाइल हमलों की आवृत्ति में कुछ कमी देखी गई है, लेकिन सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान अभी भी बड़े जवाबी हमले करने की पूरी क्षमता रखता है।
युद्ध की विभीषिका के बीच एक बड़ी खबर ईरानी मीडिया के माध्यम से सामने आई है। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और परमाणु नीति के मुखर समर्थक 81 वर्षीय कमाल खराजी एक हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस हमले में उनकी पत्नी की दुखद मृत्यु हो गई। खराजी वही नेता हैं जिन्होंने पूर्व में संकेत दिया था कि यदि परिस्थितियां बिगड़ीं, तो तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। घायल होने से कुछ समय पहले ही उन्होंने कूटनीति की विफलता पर दुख जताया था। खराजी ने कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप के वादों पर भरोसा करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि जब दुनिया बातचीत की मेज पर होती है, तब वे पीठ पीछे हमला कर देते हैं।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। कमाल खराजी जैसे अनुभवी राजनेताओं का मानना है कि अब केवल सैन्य शक्ति ही भविष्य का फैसला करेगी। एक ओर जहां इजरायल लगातार हवाई हमलों से ईरान की कमर तोड़ने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान अपनी ‘गुप्त शक्ति’ के दम पर अंतिम समय तक लड़ने का दम भर रहा है। इस संघर्ष ने न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। आने वाले दिनों में यदि जमीनी जंग शुरू होती है, तो यह आधुनिक इतिहास का सबसे विनाशकारी अध्याय साबित हो सकता है।
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