Kanker Hospital Action: कांकेर में मां-बच्चे की मौत पर बड़ा एक्शन, निजी अस्पताल के प्रसूति और सोनोग्राफी कक्ष सील

Kanker Hospital Action:  कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर स्थित एक निजी अस्पताल, ‘गौतम हॉस्पिटल’, में हुई एक गर्भवती महिला और उसके नवजात की मौत ने चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल के प्रसूति (गायनिक) और सोनोग्राफी कक्ष को सील कर दिया है। जांच में यह सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन ने प्रसव के दौरान घोर लापरवाही बरती थी। वहां न तो पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद था और न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित अनिवार्य मानकों का पालन किया जा रहा था। इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम जीएम वाहिले, तहसीलदार कुलदीप ठाकुर और जिला स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम मौके पर मौजूद रही। हालांकि, अस्पताल का मेडिसिन विभाग फिलहाल सामान्य रूप से संचालित रहेगा।

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रेफर करने के बावजूद निजी अस्पताल ने की लापरवाही

मृतका द्रौपदी कोमरा (31 वर्ष), जो दुर्गूकोंदल तहसील के ग्राम चाहचांड की निवासी थी, को प्रसव पीड़ा के बाद 15 मई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर में भर्ती कराया गया था। 17 मई को हुई सोनोग्राफी में डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया था कि गर्भ में पानी का स्तर (एमनियोटिक फ्लूइड) खतरनाक रूप से कम है। डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव को असंभव बताते हुए जच्चा और बच्चा की जान बचाने के लिए महिला को कांकेर मेडिकल कॉलेज रेफर किया था। परिजनों का आरोप है कि कांकेर मेडिकल कॉलेज में नर्सों के असहयोगात्मक व्यवहार से परेशान होकर वे द्रौपदी को वापस निजी गौतम हॉस्पिटल ले आए। वहां की गंभीर स्थिति को जानने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने सिजेरियन ऑपरेशन करने के बजाय सामान्य प्रसव का जोखिम भरा प्रयास जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप 18 मई की शाम जच्चा-बच्चा दोनों ने दम तोड़ दिया।

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स्वास्थ्य विभाग की जांच में मिली बड़ी खामियां

घटना के बाद उपजे जनाक्रोश को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. आर.सी. ठाकुर ने मामले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए। जांच दल ने जब अस्पताल का निरीक्षण किया, तो वहां प्रशासनिक और चिकित्सा संबंधी गंभीर खामियां पाई गईं। डॉ. ठाकुर ने बताया कि डिलीवरी के बेहद नाजुक समय पर अस्पताल में न तो कोई योग्य चिकित्सक मौजूद था और न ही कोई प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध था। अस्पताल की कार्यप्रणाली प्रसूति सेवाओं के लिए तय किए गए नियमों का खुला उल्लंघन कर रही थी। सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।

मरीजों की सुरक्षा प्राथमिकता: भविष्य के लिए कड़ा संदेश

इस कार्रवाई ने निजी अस्पतालों की मनमानी पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। डॉ. आर.सी. ठाकुर ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करना है। अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है। यह घटना अन्य निजी स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे मरीजों की जान से खेलकर अपना मुनाफा न कमाएं। प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी अस्पताल में इलाज कराने से पहले वहां की सुविधाओं और स्टाफ की योग्यता के बारे में पूरी जानकारी रखें, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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