Bangladesh Cyber Attack
Bangladesh Cyber Attack: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। देश के प्रमुख दक्षिणपंथी दल जमात-ए-इस्लामी के अमीर (प्रमुख) शफीकुर रहमान के फेसबुक अकाउंट से महिलाओं के विरुद्ध की गई एक अत्यंत विवादित टिप्पणी ने पूरे देश में भूचाल ला दिया है। हालांकि, इस मामले में अब एक सनसनीखेज मोड़ आया है। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच ने इस कांड में सीधे राष्ट्रपति भवन (बंगाभवन) के एक सहायक प्रोग्रामर, मोहम्मद सरवर आलम को हिरासत में लिया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वास्तव में एक व्यक्तिगत साइबर अपराध था या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक साजिश छिपी है।
विवाद की जड़ पिछले शनिवार को साझा की गई एक फेसबुक पोस्ट है। शफीकुर रहमान के आधिकारिक अकाउंट से पोस्ट किया गया कि आधुनिकता के नाम पर जो महिलाएं घर से बाहर काम करने निकलती हैं, वे ‘वेश्यावृत्ति’ को बढ़ावा दे रही हैं। पोस्ट में तर्क दिया गया था कि महिलाओं का सार्वजनिक जीवन में आना उनके शोषण का मुख्य कारण है। इस बयान के वायरल होते ही ढाका यूनिवर्सिटी सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस टिप्पणी को न केवल महिलाओं की गरिमा के खिलाफ, बल्कि बांग्लादेश के प्रगतिशील समाज पर एक बड़ा प्रहार माना गया।
जब जमात-ए-इस्लामी चौतरफा आलोचनाओं से घिर गई, तो दल की आईटी सेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बचाव की मुद्रा अपनाई। उन्होंने दावा किया कि शफीकुर रहमान का अकाउंट हैक किया गया था। जमात का आरोप है कि हैकर ने राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक सरकारी ईमेल एड्रेस का उपयोग कर इस कृत्य को अंजाम दिया। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि हिरासत में लिए गए प्रोग्रामर सरवर आलम ने कथित तौर पर चुनाव संबंधी डेटा साझा करने के बहाने एक फाइल भेजी थी, जिसे खोलते ही अकाउंट का एक्सेस उनके पास चला गया। पुलिस ने सरवर के पास से मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
भले ही जमात-ए-इस्लामी इसे हैकिंग बता रही हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनाव से पहले किया गया ‘डैमेज कंट्रोल’ मान रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि शफीकुर रहमान का इतिहास पहले भी कट्टरपंथी बयानों से भरा रहा है, जहाँ उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व और उनके सार्वजनिक जीवन में आने का विरोध किया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह पोस्ट गलती से साझा हुई या यह जमात की असली सोच का प्रतिबिंब थी। विपक्षी दल बीएनपी और आम नागरिक इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे जमात की चुनावी स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
ढाका पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शफीकुल इस्लाम के अनुसार, मामले की तह तक जाने के लिए सरवर आलम से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसमें बंगाभवन के अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। जमात ने दावा किया है कि उनके कई शीर्ष नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगातार साइबर हमले हो रहे हैं। फिलहाल, पूरा मामला डिजिटल सुरक्षा और चुनावी शुचिता के बीच फंसा हुआ है। 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले इस विवाद ने महिला मतदाताओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ना तय है।
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