Jashpur Court Verdict: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हुए दो गंभीर अपराधों में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। पॉक्सो विशेष न्यायालय और विशेष एससी/एसटी न्यायालय ने अलग-अलग मामलों की सुनवाई पूरी करते हुए दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। एक मामले में आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि दूसरे मामले में दोषी को 7 वर्ष के सश्रम कारावास का दंड मिला। अदालत ने अपने फैसले में पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को महत्वपूर्ण आधार माना।

पहला मामला: दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप
पहला मामला फरसाबहार थाना क्षेत्र का है, जहां सितंबर 2024 में एक 13 वर्षीय मूक-बधिर बालिका के साथ कथित दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। आरोप है कि गांव के एक 62 वर्षीय व्यक्ति ने बच्ची को बहला-फुसलाकर सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद जब बालिका घर लौटी तो उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई दिया। परिजनों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से उससे बातचीत की, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस ने जुटाए वैज्ञानिक और चिकित्सीय साक्ष्य
पीड़िता के परिजनों की शिकायत मिलने के बाद फरसाबहार पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने चिकित्सीय परीक्षण, वैज्ञानिक साक्ष्य और अन्य आवश्यक प्रमाण एकत्र किए। निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी साक्ष्यों के साथ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और व्यवस्थित विवेचना को अदालत ने भी अपने फैसले में महत्वपूर्ण माना।
पॉक्सो अदालत ने सुनाई 20 वर्ष की सजा
विशेष पॉक्सो न्यायालय, कुनकुरी में मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। न्यायालय ने पीड़िता को शासन की निर्धारित पीड़ित सहायता योजना के तहत मुआवजा उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया।
दूसरा मामला: शादी का झूठा वादा कर शोषण का आरोप
दूसरा मामला कुनकुरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप के अनुसार, मध्य प्रदेश के सतना निवासी एक व्यक्ति ने वर्ष 2024 में अपने साथ काम करने वाली युवती को स्वयं को अविवाहित बताकर प्रेम संबंध स्थापित किए। शिकायत के अनुसार, उसने विवाह का वादा किया और इसी भरोसे पर युवती का शारीरिक शोषण किया। इस दौरान पीड़िता ने एक बच्चे को भी जन्म दिया। आरोप है कि आरोपी लगातार बच्चे को अपना नाम देने और विवाह करने का आश्वासन देता रहा।
सच्चाई सामने आने पर दर्ज हुआ मामला
बाद में पीड़िता को जानकारी मिली कि आरोपी पहले से विवाहित है और उसके बच्चे भी हैं। इसके बाद जब पीड़िता ने विवाह की बात कही तो आरोपी ने साफ इनकार कर दिया। इसके बाद युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कुनकुरी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
विशेष न्यायालय ने सुनाई सात वर्ष की सजा
विशेष एससी/एसटी न्यायालय, जशपुर में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया और उसे सात वर्ष के सश्रम कारावास के साथ जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध पर सख्त रुख
जशपुर पुलिस ने कहा है कि महिलाओं, बच्चों और विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करना और अदालत में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाती है, ताकि दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिल सके। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी इस प्रकार के मामलों में निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई प्राथमिकता बनी रहेगी।
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