Jashpur News
Jashpur News : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला अस्पताल से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के ड्रेसर किशोर कुमार चौहान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुलेआम रिश्वत की रकम लेते और उसे गिनते हुए नजर आ रहा है। वीडियो में ड्रेसर न केवल 5 हजार रुपये लेता दिख रहा है, बल्कि वह सामने वाले व्यक्ति से 2 हजार रुपये अतिरिक्त देने की मांग भी कर रहा है। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है।
यह पूरा मामला एक सरकारी कर्मचारी के इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, एक सरकारी सेवक ने अपने इलाज पर हुए खर्च को वापस पाने के लिए विभाग में आवेदन दिया था। इसी बिल को पास कराने और फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में ड्रेसर किशोर कुमार चौहान ने घूस की मांग की थी। वीडियो में दोनों के बीच हुई बातचीत से स्पष्ट होता है कि इलाज में करीब 45 हजार रुपये खर्च हुए थे। बातचीत के दौरान आईवीएफ (IVF) प्रक्रिया का भी जिक्र आया, जिसे लेकर ड्रेसर सौदेबाजी करता सुनाई दे रहा है।
वीडियो में ड्रेसर की बातचीत काफी चौंकाने वाली है। वह रिश्वत देने वाले व्यक्ति पर दबाव बनाते हुए कह रहा है कि “जिस अधिकारी के हस्ताक्षर से पैसा निकलना है, उसे तुम हिस्सा नहीं देना चाहते हो।” उसने यह भी कहा कि अगर वह चाहता तो फाइल को सीधे रायपुर भेज देता, जहाँ से पैसा कभी पास नहीं होता क्योंकि आईवीएफ (IVF) के इलाज के लिए रिम्बर्समेंट का प्रावधान पेचीदा है। ड्रेसर ने यह जताने की कोशिश की कि वह नियम विरुद्ध जाकर बिल पास करवा रहा है, इसलिए उसे और उसके वरिष्ठों को ‘सेवा शुल्क’ देना अनिवार्य है। हालांकि, वीडियो बनाने वाला व्यक्ति कौन है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
9 अप्रैल को वीडियो सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने मामले का संज्ञान लिया। प्राथमिक जांच में इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। नतीजतन, सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत किशोर कुमार चौहान को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान उसका मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलगांव तय किया गया है, जहाँ उसे नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल साक्ष्य पहली नजर में दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। डॉ. जात्रा के अनुसार, एक शासकीय सेवक द्वारा इस तरह की अवैध वसूली विभाग की छवि को जनता की नजरों में धूमिल करती है। उन्होंने कहा कि केवल निलंबन ही काफी नहीं है, बल्कि इस मामले की विस्तृत विभागीय जांच भी की जाएगी। यदि दोष पूरी तरह सिद्ध हो जाता है, तो आरोपी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई और बर्खास्तगी तक का प्रावधान किया जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद जशपुर जिला अस्पताल और पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। इस घटना ने यह उजागर कर दिया है कि कैसे निचले स्तर के कर्मचारी फाइलों को रोकने और पास करने के नाम पर भ्रष्टाचार का जाल बुनते हैं। प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस खेल में ड्रेसर के साथ कुछ बड़े अधिकारी भी शामिल थे, जिनका नाम वह वीडियो में ले रहा था। विभाग का दावा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी पहली प्राथमिकता है और भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी।
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