PM Modi 25 Years : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिल्ली के आईजीआई स्टेडियम में देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी फल या व्यक्तिगत उपलब्धि की अपेक्षा से कर्म नहीं किया, बल्कि हर जिम्मेदारी को अपना कर्तव्य मानकर निभाया। पीएम मोदी ने इस यात्रा का श्रेय जनता, कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को दिया।
140 करोड़ भारतीयों के लिए की प्रार्थना
पीएम मोदी ने बताया कि कार्यक्रम से पहले उन्होंने श्री विनायक मंदिर में दर्शन किए और देश तथा 140 करोड़ भारतीयों के लिए प्रार्थना की। उन्होंने परमात्मा से देश की सेवा के लिए और अधिक शक्ति, ऊर्जा और सामर्थ्य मांगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वह जिस दायित्व पर हैं, उसमें जनता का सबसे बड़ा योगदान है।
जंगलों और पहाड़ों में सेवा से शुरू हुआ सफर
अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय संगठन के रास्ते को चुना। उन्होंने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में आदिवासियों के बीच सेवा कार्य किया। पीएम मोदी ने कहा कि उस समय उनका ध्यान चुनाव लड़ने से ज्यादा संगठन और समाज की सेवा पर था।
मिशन के लिए जीवन जीने की बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि भविष्य में वह क्या बनेंगे या उन्हें कौन सा पद मिलेगा। बचपन में मिली शिक्षा ने उन्हें महत्वाकांक्षा के बजाय मिशन के लिए जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे स्वीकार करते हुए आगे बढ़ते गए और कभी खुद को अकेला महसूस नहीं किया।
हर घटना से मिली नई सीख
पीएम मोदी ने अपने जीवन की घटनाओं को सीख का माध्यम बताया। उन्होंने मोरबी की बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि उस त्रासदी ने उन्हें सेवा के भाव के साथ दिन-रात काम करने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, सफलता ने जिम्मेदारी बढ़ाई, जबकि उपलब्धियों ने बड़े लक्ष्य हासिल करने का साहस दिया।
गुजरात से दिल्ली तक बढ़ा दायित्व
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभव को याद करते हुए मोदी ने कहा कि उस समय उनके सामने सरकार चलाने का अनुभव नहीं था। उन्होंने जमीन पर समस्याओं को समझने, फाइलों के अटकने के कारणों और योजनाओं की अंतिम व्यक्ति तक डिलीवरी जैसे विषयों पर काम किया। वर्ष 2014 में देश ने उनकी जिम्मेदारी का विस्तार किया।
सुशासन को बताया सबके विकास का आधार
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी समस्या का असर जाति या समुदाय देखकर नहीं होता। खेत में पानी की कमी हो या बिजली की समस्या, उसका प्रभाव समाज के सभी वर्गों पर पड़ता है। इसलिए उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ को सुशासन का आधार बताया और योजनाओं को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
भारत के गौरव और सामर्थ्य का जिक्र
पीएम मोदी ने भारत के प्राचीन गौरव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने कठिन दौर में भी मानवता को ज्ञान और मूल्यों की रोशनी दी। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और श्री अरविंद के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के महान और गौरवशाली भविष्य का सपना पूरा करने के लिए देश को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।
आत्मनिर्भर भारत से दुनिया तक पहुंचने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया भारत की क्षमताओं और स्वदेशी तकनीक पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह आज भारत के पायलट की चर्चा हो रही है, भविष्य में पूरी दुनिया मेड इन इंडिया विमान की चर्चा करेगी। उन्होंने किसानों, जल प्रबंधन और गरीबों के सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में भारतीय समाधानों को वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने की उम्मीद जताई।
2047 तक विकसित भारत का संकल्प
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास 140 करोड़ से अधिक लोगों की सामूहिक शक्ति है और इसे बड़े लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश अब रुकने वाला नहीं है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने राष्ट्र सेवा को अपना धर्म बताते हुए कहा कि जब तक भारत विकसित नहीं होता, वह न रुकेंगे, न थकेंगे और न अपने मार्ग से विचलित होंगे।
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