Jitendra Awhad : एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) शरद पवार गुट के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने शनिवार को सनातन धर्म पर एक विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने भारत के विकास को रोकने और समाज में अनेक समस्याओं को बढ़ावा देने का काम किया है। आव्हाड ने यह भी दावा किया कि ‘सनातन धर्म’ नामक कोई धर्म अस्तित्व में नहीं था और हम सभी वास्तव में हिंदू धर्म के अनुयायी हैं।

जितेंद्र आव्हाड ने छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज का किया जिक्र
आव्हाड ने सनातन धर्म के प्रभाव को लेकर विस्तार से बात करते हुए कहा कि यह धर्म भारतीय समाज को नुकसान पहुंचाने का कारण बना। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन धर्म ने शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को चुनौती दी थी। इसके साथ ही, उन्होंने छत्रपति संभाजी महाराज को भी गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। आव्हाड के मुताबिक, सनातन धर्म के अनुयायी ने इन महान नायकों के योगदान को अनदेखा किया और उनके खिलाफ अन्याय किया।

सामाजिक सुधारकों के खिलाफ हुए अत्याचारों का उल्लेख
विधायक ने आगे कहा कि सनातन धर्म ने समाज में बदलाव लाने वाले कई महान सुधारकों के खिलाफ अत्याचार किए। उन्होंने उदाहरण के तौर पर ज्योतिराव फुले का जिक्र किया, जिनकी जान लेने की कोशिश की गई थी। इसके साथ ही, सावित्रीबाई फुले को रास्ते में अपमानजनक स्थिति में फेंकी गई गंदगी और गोबर का भी उल्लेख किया। जितेंद्र आव्हाड का कहना था कि सनातन धर्म के अनुयायी ने शाहू महाराज की हत्या के लिए भी षड्यंत्र रचा था।
डॉ. भीमराव आंबेडकर और मनुस्मृति पर टिप्पणी
आव्हाड ने डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम लेते हुए कहा कि सनातन धर्म ने आंबेडकर जी को उनके मूल अधिकारों से वंचित रखा, जैसे कि पानी पीने और शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों को जलाने का साहस दिखाया। आव्हाड ने यह भी आरोप लगाया कि आंबेडकर ने दमनकारी नीतियों के खिलाफ विरोध किया और समाज में समानता की बात की।
मनुस्मृति और सनातन धर्म की विचारधारा पर टिप्पणी
जितेंद्र आव्हाड ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आज के समय में यह स्पष्ट रूप से कहा जाना चाहिए कि मनुस्मृति के रचनाकार भी सनातन परंपरा से निकले थे। उनका कहना था कि मनुस्मृति में दिए गए विचार और सनातन धर्म की विचारधारा विकृत हैं, जिन्होंने समाज में भेदभाव और असमानता को बढ़ावा दिया है।
नए राजनीतिक विवाद की शुरुआत
आव्हाड का यह बयान राजनीति में एक नए विवाद की शुरुआत कर सकता है, खासकर उस समय में जब देश भर में समाजिक और धार्मिक मुद्दों पर तीखी बहस चल रही है। उनके इस बयान पर सियासी हलकों में प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है, और यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह बयान राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव का कारण बनेगा।










