NEET Row: नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के निकट कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन ने मंगलवार को नया राजनीतिक मोड़ ले लिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य वरिष्ठ नेता छात्रों से जुड़े मुद्दों तथा NEET परीक्षा विवाद को लेकर धरने पर बैठे। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने पहुंचे। मुलाकात के बाद उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से भी चर्चा की और फिर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर विस्तृत बयान जारी कर राहुल गांधी पर अपनी बात बदलने का आरोप लगाया।

सरकार ने बातचीत के लिए भेजा प्रतिनिधिमंडल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने बयान में कहा कि सरकार ने स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के उद्देश्य से उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को कांग्रेस नेताओं से बातचीत के लिए भेजा था। उनके अनुसार, कांग्रेस नेताओं से अनुरोध किया गया कि वे धरना समाप्त करें, क्योंकि जिस स्थान पर प्रदर्शन किया जा रहा था, वह धरने के लिए निर्धारित नहीं था और इससे आम लोगों को असुविधा हो रही थी। सरकार की ओर से बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया गया।

NEET पर चर्चा की मांग स्वीकार होने का दावा
जितेंद्र सिंह के मुताबिक, बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार संसद में NEET परीक्षा और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए तैयार हो जाए, तो कांग्रेस धरना समाप्त कर देगी। मंत्री ने दावा किया कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व से अनुमति मिलने के बाद राहुल गांधी को यह आश्वासन दिया गया कि संसद में इस विषय पर चर्चा कराने के लिए सरकार तैयार है। उनके अनुसार, सरकार ने राहुल गांधी की पहली मांग स्वीकार कर ली थी।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की नई मांग पर विवाद
केंद्रीय मंत्री ने आगे आरोप लगाया कि जब राहुल गांधी को संसद में चर्चा का आश्वासन दिया गया, तब उन्होंने नई शर्त रखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर दी। जितेंद्र सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि अब उनकी दो मांगें हैं—पहली संसद में चर्चा और दूसरी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा। मंत्री का दावा है कि जब उन्हें याद दिलाया गया कि पहले केवल चर्चा की मांग की गई थी, तो राहुल गांधी ने कहा कि अब उनकी मांगें बदल चुकी हैं।
धरना स्थल को लेकर भी हुई बहस
जितेंद्र सिंह ने अपने बयान में कहा कि बातचीत के दौरान गृह सचिव ने राहुल गांधी से आग्रह किया कि यह स्थान धरना देने के लिए उपयुक्त नहीं है और उन्हें वहां से हट जाना चाहिए। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने जवाब दिया कि वे अपनी इच्छा से जहां चाहें वहां बैठ सकते हैं। मंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक संवाद के विपरीत बताते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं से अधिक जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
राहुल गांधी के रवैये पर सरकार का हमला
अपने बयान में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार NEET और उससे जुड़े सभी विषयों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस की ओर से अब तक इस विषय पर नियमानुसार औपचारिक चर्चा का नोटिस नहीं दिया गया है। मंत्री ने राहुल गांधी के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से अपनी बात बदलना लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी ने लोगों से समर्थन की अपील की
दूसरी ओर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के समर्थन में लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई पूरे देश के युवाओं और उनके परिवारों से जुड़ा विषय है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को छात्रों के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने सभी नागरिकों से न्याय की मांग के समर्थन में प्रधानमंत्री आवास के निकट चल रहे धरने में शामिल होने का आह्वान किया।
धरने के दौरान लगे सरकार विरोधी नारे
प्रधानमंत्री आवास के निकट चल रहे प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने छात्रों को न्याय देने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। वहीं सरकार और कांग्रेस के अलग-अलग दावों के कारण यह मुद्दा अब संसद के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का केंद्र बन गया है।











