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JNU violence: JNU में फिर खूनी संघर्ष, ABVP और लेफ्ट गुटों के बीच जमकर चले लात-घूंसे, कई छात्र लहूलुहान

JNU violence: देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर वैचारिक मतभेद हिंसा में बदल गए हैं। 22 फरवरी की देर रात करीब 1:30 बजे विश्वविद्यालय परिसर उस समय अखाड़ा बन गया, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प हो गई। मिली जानकारी के अनुसार, इस विवाद के दौरान जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें ABVP के मीडिया संयोजक विजय जायसवाल गंभीर रूप से चोटिल हो गए हैं। उनके अलावा कई अन्य छात्रों को भी चोटें आई हैं, जिससे कैंपस में डर और तनाव का माहौल व्याप्त है।

स्कूल बिल्डिंग पर ताला लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद

इस ताजा विवाद की जड़ स्कूल बिल्डिंग पर ताला लगाए जाने की घटना बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, वामपंथी झुकाव वाले छात्र संगठनों ने किसी मुद्दे को लेकर स्कूल बिल्डिंग में तालाबंदी करने का प्रयास किया था, जिसका ABVP कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई सामान्य बहस देखते ही देखते हिंसक टकराव में तब्दील हो गई। छात्रों के दो गुट आमने-सामने आ गए और अंधेरे का फायदा उठाकर एक-दूसरे पर हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मौके पर काफी देर तक अराजकता की स्थिति बनी रही।

एबीवीपी का आरोप: पढ़ाई कर रहे छात्रों को बनाया गया निशाना

घटना के बाद ABVP ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस हिंसा की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इसे ‘भीषण हिंसा’ करार देते हुए आरोप लगाया कि वामपंथी गुटों ने उन छात्रों पर हमला किया जो पुस्तकालय में शांतिपूर्वक अपनी पढ़ाई कर रहे थे। पोस्ट में स्पष्ट किया गया कि यह केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि छात्रों के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश और लक्षित हमला है। संगठन ने दिल्ली पुलिस से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में मारपीट का दावा

ABVP के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के सुरक्षा तंत्र पर भी सवाल उठाए हैं। एक कार्यकर्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब यह मारपीट हो रही थी, तब विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी और पुलिस बल वहां मौजूद थे, फिर भी वामपंथी गुटों ने छात्रों को लाठियों, घूंसे और लातों से पीटा। आरोप है कि विचारधारा से असहमत होने के कारण मनीष चौधरी (एसएसएस के पूर्व पार्षद) और उनके साथियों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। छात्रों का दावा है कि हमलावरों की भीड़ ने हिंसक नारे लगाते हुए आतंक का माहौल पैदा कर दिया था।

70 से अधिक लोगों की भीड़ पर हमले का आरोप

संगठन ने इस पूरी घटना को सुनियोजित बताते हुए दावा किया है कि लगभग 70 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ ने इस हिंसा को अंजाम दिया। ABVP ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि इस हमलावर भीड़ का नेतृत्व प्रणंजय, दाऊद सिद्दीकी और दानिश अली जैसे छात्र कर रहे थे। इन आरोपों के बाद कैंपस में दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और घायल छात्रों का उपचार जारी है। परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो।

छात्र राजनीति और प्रशासन की चुनौती

JNU में इस तरह की घटनाएं बार-बार सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक विफलता पर सवाल खड़े करती हैं। जहाँ एक ओर छात्र संगठन एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं, वहीं सामान्य छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर जेएनयू प्रशासन द्वारा कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हिंसा शुरू करने वालों की सटीक पहचान की जा सके।

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