Jonathan Tortoise
Jonathan the Tortoise: तेजी से बदलती इस आधुनिक दुनिया में, जहाँ हर दिन नई इमारतें खड़ी हो रही हैं और तकनीक पुरानी पड़ रही है, एक ऐसा जीव भी है जो इस पूरे बदलाव का मूक गवाह रहा है। अफ्रीका के पास स्थित सेंट हेलेना आईलैंड पर रहने वाला विशालकाय कछुआ ‘जॉनथन’ आज 191 वर्ष का हो चुका है। जब जॉनथन का जन्म हुआ था, तब न तो मोबाइल फोन थे, न बिजली का आविष्कार हुआ था और न ही आधुनिक सुख-सुविधाओं की कोई कल्पना थी। समय की रफ्तार को अपनी धीमी चाल से मात देने वाला यह जीव आज दुनिया का सबसे बुजुर्ग जीवित थलीय जानवर माना जाता है।
जॉनथन को आज केवल एक जानवर नहीं, बल्कि धरती पर चलता-फिरता इतिहास माना जाता है। उसने इंसानों की कई पीढ़ियों को आते और जाते देखा है। जब दुनिया में बड़े-बड़े किलों का राज था और आवाजाही के लिए घोड़ागाड़ियों का इस्तेमाल होता था, तब से जॉनथन का अस्तित्व बना हुआ है। ‘सेशेल्स जायंट टॉरटॉइज’ प्रजाति का यह कछुआ, जिसे वैज्ञानिक रूप से Aldabrachelys gigantea hololissa कहा जाता है, अपनी औसत आयु (150 वर्ष) को बहुत पहले ही पार कर चुका है। 191 साल की उम्र में भी उसका जीवित रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
रिकॉर्ड्स के अनुसार, जॉनथन को साल 1882 में सेशेल्स द्वीप समूह से सेंट हेलेना आईलैंड लाया गया था। उस समय वह पूरी तरह विकसित हो चुका था, जिसके आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि उसका जन्म लगभग 1832 के आसपास हुआ होगा। तब से लेकर आज तक, जॉनथन वहीं के ‘प्लांटेशन हाउस’ में रह रहा है, जो द्वीप के गवर्नर का आधिकारिक निवास है। उसने अपने जीवनकाल में दर्जनों गवर्नरों के कार्यकाल देखे हैं और आज वह वहां का सबसे प्रतिष्ठित निवासी बन चुका है।
जॉनथन का जीवन इतिहास की एक ऐसी किताब है जिसके पन्ने सदियों पुराने हैं। जब वह जवान था, तब दुनिया के कई हिस्सों में दास प्रथा प्रचलित थी। उसके जीवनकाल में ही दास प्रथा का अंत हुआ, पहली बार कैमरे से तस्वीर खींची गई, टेलीफोन का आविष्कार हुआ और मानवता ने दो भीषण विश्व युद्ध झेले। भारत की आजादी से लेकर कई साम्राज्यों के उदय और पतन तक, जॉनथन ने सबकुछ देखा है। जहाँ दुनिया ने तकनीकी क्रांति देखी, वहीं जॉनथन अपनी उसी सादगी और शांति के साथ जीता रहा।
आज 191 वर्ष की आयु में जॉनथन की आंखों की रोशनी काफी धुंधली हो चुकी है और उसकी सूंघने की शक्ति भी कम हो गई है। हालांकि, उसका स्वास्थ्य अब भी संतुलित है। सेंट हेलेना प्रशासन और पशु चिकित्सकों की एक टीम उसकी विशेष देखभाल करती है। उसके खानपान में सेब, गाजर, खीरा और ताजी हरी सब्जियों को शामिल किया गया है ताकि उसे भरपूर पोषण मिले। धूप में सुस्ताना और घास के मैदानों में धीमी चाल से घूमना उसकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है।
जॉनथन का नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दुनिया के सबसे बुजुर्ग जीवित थलीय जानवर के रूप में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वैज्ञानिक आज भी उसकी लंबी उम्र के रहस्यों पर शोध कर रहे हैं। जॉनथन हमें यह संदेश देता है कि यदि प्रकृति को सही वातावरण, देखभाल और शांति मिले, तो जीवन असाधारण रूप से लंबा और सुंदर हो सकता है। वह न केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, बल्कि संरक्षण और धैर्य की एक जीती-जागती मिसाल भी है।
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