Kanker Ghar Wapsi
Kanker Ghar Wapsi: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से सांस्कृतिक और सामाजिक पुनर्जागरण की एक बड़ी खबर सामने आई है। रविवार को जिले के विभिन्न गांवों के लगभग 200 लोगों ने ईसाई धर्म का त्याग कर पुनः सनातन धर्म अपनाया। यह सामूहिक ‘घर वापसी’ कार्यक्रम कांकेर के ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। धर्मांतरण के बढ़ते मामलों के बीच एक साथ इतने लोगों का अपने मूल संस्कारों की ओर लौटना एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। पीढ़ापाल, धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुल जैसे गांवों के ग्रामीणों ने आपसी सहमति से यह साहसिक निर्णय लिया, जिसे समाज के वरिष्ठ जनों ने पूर्ण समर्थन दिया।
इस ऐतिहासिक घर वापसी कार्यक्रम का आयोजन ग्राम पीढ़ापाल में किया गया था। यहाँ सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल था और बड़ी संख्या में विभिन्न आदिवासी समाजों के लोग एकत्रित हुए थे। कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। सर्व आदिवासी समाज के रीति-रिवाजों के अनुसार, वापस लौटने वाले सभी 200 लोगों पर गंगाजल छिड़क कर उनका शुद्धिकरण किया गया और उन्हें उनके मूल गोत्र व परंपराओं में पुनः दीक्षित किया गया। समाज के प्रमुखों ने तिलक लगाकर और माला पहनाकर इन परिवारों का स्वागत किया, जिससे वहां मौजूद कई ग्रामीण भावुक हो उठे।
मूल धर्म में लौटने वाले परिवारों ने धर्मांतरण के पीछे की कड़वी सच्चाई साझा की। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें ईसाई मिशनरियों द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए गए थे। किसी को गंभीर बीमारी ठीक करने का झांसा दिया गया, तो किसी को आर्थिक मदद और बच्चों की शिक्षा का लालच दिया गया। ग्रामीणों ने स्वीकार किया कि वे अज्ञानता और विवशता के कारण भ्रमित हो गए थे। कई वर्षों तक ईसाई धर्म के आचरण का पालन करने के बाद उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कटने का अहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने सामाजिक संवाद किया और सर्वसम्मति से अपनी मूल पहचान वापस पाने का फैसला लिया।
सर्व आदिवासी समाज के सक्रिय सदस्य ईश्वर कावड़े ने बताया कि इस महत्वपूर्ण आयोजन में पीढ़ापाल सहित आसपास के 25 गांवों के समाज प्रमुख, गायता (पुजारी), पटेल और ग्राम प्रमुख शामिल हुए। समाज प्रमुखों की उपस्थिति ने इस वापसी को आधिकारिक और सामाजिक मान्यता प्रदान की। ईश्वर कावड़े ने यह भी साझा किया कि क्षेत्र में अभी केवल 3 से 4 परिवार ऐसे बचे हैं जो धर्मांतरित हैं, लेकिन वे भी जल्द ही घर वापसी की प्रक्रिया पूरी करेंगे। समाज अब इन परिवारों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान कर रहा है।
कांकेर में हुई इस सामूहिक वापसी से स्थानीय आदिवासी समाज में हर्ष व्याप्त है। समाज के जानकारों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण होगा। प्रशासन ने भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखी। जानकारों का कहना है कि लालच देकर कराए जा रहे धर्मांतरण पर लगाम लगाने के लिए अब ग्रामीण स्वयं जागरूक हो रहे हैं। इस घटना ने पूरे बस्तर संभाग में एक संदेश दिया है कि अपनी जड़ों की ओर लौटना ही सामाजिक और सांस्कृतिक सुरक्षा का एकमात्र मार्ग है।
Bengal Election Results 2026 Live : पश्चिम बंगाल की 293 विधानसभा सीटों (फाल्टा को छोड़कर)…
Somwar Ke Upay : हिंदू धर्म में सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को…
Aaj Ka Rashifal 4 May 2026 Rashifal: आज 4 मई 2026 दिन सोमवार है. कल…
US Iran Tension : वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता कूटनीतिक गतिरोध एक बार फिर…
Mukesh Khanna : टीवी जगत के दिग्गज अभिनेता और बच्चों के चहेते 'शक्तिमान' यानी मुकेश…
Nepal Politics : नेपाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है।…
This website uses cookies.