Kawardha Rescue News: कवर्धा में उफनती ढोलढोली नदी में फंसी माजदा, ग्रामीणों ने बचाई यात्रियों की जान

Kawardha Rescue News: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में इन दिनों भारी बारिश का कहर जारी है। लगातार हो रही वर्षा के चलते जिले की तमाम छोटी-बड़ी नदियां और नाले उफान पर हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा जनमानस को लगातार सतर्क किया जा रहा है और विशेष रूप से उफनती नदियों व रपटों को पार न करने की सख्त चेतावनी दी गई है। इसके बावजूद, आम लोगों की लापरवाही के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसी ही एक दिल दहला देने वाली घटना कुकदूर थाना क्षेत्र से सामने आई है, जहां अपनी जान जोखिम में डालकर एक माजदा चालक ने यात्रियों से भरे वाहन को नदी के तेज बहाव में उतार दिया, जिससे दर्जनों लोगों की जान पर बन आई।

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ढोलढोली नदी का तेज बहाव: 30 यात्रियों की सांसें अटकीं

घटना कुकदूर से पटपर होते हुए सिंदूरखार और बेलकी जाने वाले मार्ग की है, जहां ढोलढोली नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा था। इस दौरान एक माजदा वाहन चालक ने अपनी और यात्रियों की सुरक्षा को दरकिनार करते हुए नदी पार करने का दुस्साहसिक निर्णय लिया। वाहन में महिलाओं और बच्चों सहित कुल 25 से 30 यात्री सवार थे। जैसे ही वाहन नदी के बीचों-बीच पहुंचा, पानी के तेज बहाव के दबाव के कारण इंजन अचानक बंद हो गया। वाहन पानी की प्रचंड लहरों के बीच फंस गया और धीरे-धीरे गहरे हिस्से की ओर खिसकने लगा। वाहन के अंदर सवार महिलाओं और बच्चों की चीख-पुकार से वहां अफरा-तफरी मच गई।

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देवदूत बने ग्रामीण: साहस और तत्परता ने टाला बड़ा हादसा

उफनती नदी के बीचों-बीच फंसे वाहन को देख किनारे मौजूद ग्रामीणों का कलेजा कांप उठा, लेकिन उन्होंने घबराने के बजाय तत्परता दिखाई। बिना अपनी जान की परवाह किए, गांव के कई साहसी लोग उफनती और जानलेवा नदी की धाराओं में कूद गए। ग्रामीणों ने एक मानवीय श्रृंखला बनाई और कड़ी मशक्कत के बाद वाहन में फंसे एक-एक यात्री को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ग्रामीणों के इस अदम्य साहस और समय पर की गई मदद के कारण एक भीषण दुर्घटना टल गई। इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना इस बात का प्रमाण है कि चालक की एक छोटी सी लापरवाही कितने लोगों की जान ले सकती थी।

प्रशासन की सख्त चेतावनी: जोखिम न लें, सुरक्षित रहें

यह घटना कबीरधाम जिले में बारिश के दौरान बरती जा रही लापरवाही का एक ज्वलंत उदाहरण है। प्रशासनिक अमला बार-बार अपील कर रहा है कि बारिश के मौसम में नदी-नालों को पार करना मौत को बुलावा देने जैसा है। जलस्तर कब बढ़ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। अतः प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लेना चाहिए। किसी भी मार्ग पर पानी का बहाव देखकर उसे पार करने का जोखिम उठाने से बचें। आपकी जान सबसे कीमती है, और इस तरह की जल्दबाजी से बचा जाना ही समझदारी है। सुरक्षा के मानकों का पालन करें और प्रकृति के प्रकोप के दौरान संयम बरतें ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

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Chandan Das

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