Kanker News : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के मुसुरपुट्टा गांव से मतांतरण, धमकी और महिला के कथित शारीरिक एवं यौन शोषण का मामला सामने आया है। गांव के 15 वर्षीय किशोर ने सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत देकर अपनी मां के साथ कथित रूप से हुए घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में पास्टर दिलीप चक्रधारी और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच की स्थिति सामने आना बाकी है।
पिता की मौत के बाद मां की तबीयत बिगड़ने का दावा
किशोर की शिकायत के अनुसार, उसके पिता राजकुमार साहू की वर्ष 2021 में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उसकी मां की तबीयत खराब रहने लगी और वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगीं। आरोप है कि इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली अम्बिका साहू ने महिला का परिचय पास्टर दिलीप चक्रधारी से कराया। किशोर का दावा है कि इसके बाद उसकी मां को धार्मिक गतिविधियों में शामिल किया गया और बीमारी ठीक होने का भरोसा दिलाया गया।
बीमारी ठीक करने और सुविधाएं देने का दिया आश्वासन
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पास्टर ने महिला से कहा कि ईसाई धर्म अपनाने पर प्रभु यीशु के माध्यम से उनकी बीमारी ठीक हो सकती है। साथ ही, घर में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिए जाने की बात भी कही गई है। किशोर के मुताबिक, महिला से पारंपरिक देवी-देवताओं की पूजा और प्रसाद छोड़ने के लिए कहा गया। आरोप है कि बाद में महिला ने धर्म परिवर्तन कर लिया और पास्टर के घर में रहने लगीं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित पक्षों या जांच एजेंसी की ओर से होना बाकी है।
मां को घर लौटने से रोकने और धमकाने का आरोप
किशोर ने शिकायत में बताया कि वह अपनी मां को समय-समय पर घर वापस आने के लिए कहता था। उसके अनुसार, मां ने बताया था कि पास्टर उन्हें घर लौटने से रोकता है और बर्बाद करने तथा बदनाम करने की धमकी देता है। शिकायत में बेटे को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने और महिला के साथ बार-बार गलत व्यवहार किए जाने के आरोप भी शामिल हैं। किशोर ने इन घटनाओं की जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
18 अक्टूबर को इकरारनामा पर हस्ताक्षर कराने का दावा
शिकायत के मुताबिक, 18 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:30 बजे पुलिसकर्मी किशोर को घर से चौकी ले गए, जहां पास्टर दिलीप चक्रधारी पहले से मौजूद था। आरोप है कि पास्टर ने महिला की संभावित मृत्यु और गांव वालों की प्रतिक्रिया का हवाला देकर किशोर से एक इकरारनामे पर हस्ताक्षर करने को कहा। किशोर का दावा है कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से वह डर गया और दस्तावेज की विषयवस्तु समझे बिना हस्ताक्षर कर दिए। दस्तावेज पर शाहिद खान और एक ग्रामीण महिला के गवाह होने की बात भी शिकायत में कही गई है।
अस्पताल से जुड़ी सूचना के बाद बढ़ी चिंता
किशोर के अनुसार, उसने अपनी मां से मिलने की इच्छा जताई, लेकिन उसे मिलने नहीं दिया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि बाद में उसे पास्टर के साथ भेजा गया और साल्हेटोला चौक के पास छोड़ दिया गया। 21 अक्टूबर की शाम उसे फोन पर मां की अस्पताल में मृत्यु होने की सूचना मिली। अगले दिन गांव की बैठक में बताया गया कि महिला की मृत्यु नहीं हुई है और वह अस्पताल में भर्ती हैं।
आईसीयू में भर्ती महिला के स्वास्थ्य को लेकर शिकायत
शिकायत के मुताबिक, 23 अक्टूबर को किशोर ग्रामीणों के साथ कोमलदेव अस्पताल पहुंचा। वहां चिकित्सकों ने महिला के निजी अंग पर चोट के निशान और फेफड़ों में संक्रमण होने की जानकारी दी। महिला के आईसीयू में भर्ती होने की बात भी कही गई है। इन चिकित्सकीय विवरणों की आधिकारिक पुष्टि स्वतंत्र रूप से होना जरूरी है।
निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
किशोर ने धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के संभावित उल्लंघन, धमकी, कथित शारीरिक एवं यौन शोषण और नाबालिग पर दबाव डालकर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराने के आरोपों की जांच की मांग की है। अब मामले में शिकायत की जांच, संबंधित लोगों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। आरोपों की सच्चाई और किसी की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।
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