राजनीति

Karnataka Congress: मतभेद खत्म! सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार ने कहा-हम सब एकजुट होकर काम करेंगे।

Karnataka Congress: कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच चल रही ‘पावर गेम’ की खींचतान ने कांग्रेस पार्टी के आलाकमान को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर कर दिया है। हाईकमान के दखल के बाद, दोनों दिग्गज नेता आज एक ही ब्रेकफास्ट टेबल पर साथ में नाश्ता करते दिखे। हालांकि यह मुलाकात ऊपर से भले ही एक साधारण शिष्टाचार भेंट लगी हो, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात का एजेंडा सत्ता है।

ऐसा माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच मार्च-अप्रैल 2026 तक मुख्यमंत्री पद का जिम्मा सिद्धारमैया से शिवकुमार को सौंपने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इस अहम नाश्ते के बाद दोनों दिग्गज नेताओं ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की, जहाँ उन्होंने मीडिया के सामने अपनी बात रखी और पार्टी में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।

Karnataka Congress: डीके शिवकुमार: “मैं सीएम के साथ हूं, हाईकमान का फैसला मानेंगे”

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने पार्टी की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा:”आप सभी के सपोर्ट से हम कांग्रेस सरकार लाए हैं और हम अपने वादे के मुताबिक काम कर रहे हैं। राज्य के लोग अपना पूरा सपोर्ट दे रहे हैं। हमें उनकी इच्छाएं पूरी करनी हैं, हम उस दिशा में काम कर रहे हैं।”शिवकुमार ने स्पष्ट किया, “हाईकमान जो भी कहेगा, हम उसे मानेंगे, और कोई ग्रुप नहीं है। अभी भी हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं। CM ने जो भी कहा, मैं CM के साथ हूं। हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं…” यह बयान हाईकमान के दबाव और पार्टी के भीतर मतभेद न होने का संदेश देने की कोशिश थी।

Karnataka Congress: सिद्धारमैया का वार: विपक्ष पर झूठे आरोप लगाने का इल्जाम

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ नाश्ते की बैठक के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपनी बात रखी। उन्होंने विपक्ष को निशाना बनाते हुए कहा:”बीजेपी और जेडीएस झूठे आरोप लगाने की आदत रखते हैं। वे अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे, उनके पास सिर्फ 60 विधायक हैं और जेडीएस के पास 18। वे हमारी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते। हमारे पास 140 विधायक हैं। यह एक बेकार कोशिश है। हम उनके झूठे आरोपों का सामना करेंगे।”सीएम ने एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि “हम दोनों ने विधानसभा चुनाव में जिस तरह काम किया था, उसी तरह हम 2028 के चुनाव में भी जाना चाहते हैं। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है। आज तक कोई मतभेद नहीं था और आगे भी नहीं होगा।”उन्होंने यह भी कहा कि, “झूठ फैलाना बीजेपी और जेडीएस की समस्या है। हम उनका सामना करेंगे, इसके लिए हमने रणनीति बना ली है।”

नाश्ता हुआ, लेकिन बात नहीं हुई: सीएम सिद्धारमैया

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम सिद्धारमैया ने अपनी और डीके शिवकुमार की मुलाकात का रोचक ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि “हमने साथ में नाश्ता किया लेकिन बात नहीं हुई। ब्रेकफास्ट अच्छा था।”

उन्होंने आगे बताया, “मैंने और डीके ने तय किया कि हम यहां अपने घर में बस ब्रेकफास्ट करेंगे। केसी वेणुगोपाल ने हमें साथ में ब्रेकफास्ट करने को कहा। पिछले एक महीने से कुछ कन्फ्यूजन था, हम दोनों बस बैठकर बात करते हैं।” उन्होंने पार्टी के अगले लक्ष्यों को स्पष्ट किया: “हमारा मकसद कॉर्पोरेशन, ग्राम पंचायत है और 2028 का चुनाव ज़रूरी है। हम चाहते हैं कि 2028 में फिर से हमारी सरकार बने।”

‘सब ठीक है’ का संदेश देती वायरल तस्वीर

मीटिंग की एक तस्वीर सामने आई, जिसमें दोनों नेता भारतीय व्यंजनों जैसे उपमा, इडली और केसरी बाथ का आनंद लेते दिखे। यह फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और इसे पार्टी द्वारा “सब ठीक है” का संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है। कांग्रेस चाहती है कि सत्ता परिवर्तन, यदि होता है, तो वह बिना किसी सार्वजनिक विवाद के हो, क्योंकि कर्नाटक पार्टी के लिए एक अहम राज्य है।

सिद्धारमैया ने X पर पोस्ट किया, “मैंने डीके शिवकुमार के साथ ब्रेकफास्ट किया।” वहीं डीके शिवकुमार ने एक और इशारा देने वाला पोस्ट लिखा, “आज सुबह ब्रेकफास्ट मीटिंग के लिए कावेरी रेजिडेंस में चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया से मिला। कर्नाटक की प्रायोरिटीज़ और आगे के रास्ते पर एक अच्छी बातचीत हुई।”

शिवकुमार-सिद्धारमैया फॉर्मूला: सत्ता हस्तांतरण का रोडमैप

सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच जो समझौता हो रहा है, उसे “शिवकुमार-सिद्धारमैया फॉर्मूला” कहा जा रहा है। इस फॉर्मूले के तहत, डीके शिवकुमार को मार्च-अप्रैल 2026 तक सत्ता हस्तांतरण का आश्वासन मिलेगा। समझौते में यह भी शामिल है कि उनके समर्थकों को कैबिनेट में ज्यादा जगह दी जाएगी, और शिवकुमार राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे। फिलहाल वह उपमुख्यमंत्री पद पर रहेंगे, ताकि पार्टी में स्थिरता बनी रहे।

सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार के पास फिलहाल मुख्यमंत्री को हटाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। ऐसे में, यह समझौता उनके लिए सबसे बेहतर विकल्प है। अचानक सिद्धारमैया को हटाना कांग्रेस के लिए जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि वह राज्य में एक बड़े जनाधार वाले नेता रहे हैं।

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