Karnataka News : कर्नाटक के बागलकोट में एक सरकारी मेडिकल ऑफिसर से जुड़े मामले ने प्रशासनिक स्तर पर चर्चा बढ़ा दी है। बागलकोट जिला पंचायत के अधिकारियों ने नम्मा क्लिनिक में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यारगल के खिलाफ कथित ड्यूटी में लापरवाही और एक साथ दो जगह काम करने के आरोपों की जांच शुरू की है। डॉ. अंकिता को कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी बताया जा रहा है। हालांकि, लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
नम्मा क्लिनिक से अनुपस्थित रहने का लगाया गया आरोप
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, डॉ. अंकिता यारगल पर आरोप है कि वह बागलकोट की वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक में निर्धारित ड्यूटी से कथित तौर पर लंबे समय तक अनुपस्थित रहीं। अधिकारियों का कहना है कि उनकी अनुपस्थिति के कारण क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर उपलब्ध नहीं रहा और वहां इलाज के लिए पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी शिकायत और संबंधित तथ्यों के आधार पर प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की है।
जांच में शामिल नहीं हुईं डॉ. अंकिता यारगल
बागलकोट जिला पंचायत के CEO गजानन बाले इस मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, निर्धारित जांच प्रक्रिया के दौरान डॉ. अंकिता यारगल पेश नहीं हुईं। इसके बाद जिला पंचायत CEO की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उन्हें अगली सुनवाई और पूछताछ के लिए 18 सितंबर को सुबह 10 बजे जिला पंचायत कार्यालय में स्थित कमरा नंबर 11 में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स के साथ नौकरी का आरोप
मामले में दूसरा प्रमुख आरोप यह है कि डॉ. अंकिता यारगल कथित तौर पर एक निजी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स कर रही थीं। इसी अवधि के दौरान वह सरकारी नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत थीं और उन्हें 70 हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन मिलने का आरोप है। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि संबंधित अवधि में दोनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभाने की अनुमति नियमों के तहत थी या नहीं।
पेशेवर आचार संहिता के उल्लंघन का भी मामला
अधिकारियों ने इस मामले में पेशेवर आचार संहिता से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख किया है। नोटिस के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्य करते हुए निजी संस्थान में मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएशन करना नियमों के अनुरूप था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने इसे कर्नाटक के सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत पंजीकृत चिकित्सकों से जुड़े नियमों और नेशनल मेडिकल कमीशन के पेशेवर आचार संहिता के संभावित उल्लंघन से जोड़कर देखा है।
अनुमति और ड्यूटी को लेकर भी उठे सवाल
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि डॉ. यारगल को एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल की ओर से अनुमति मिलने की बात सामने आई है। इसके बावजूद अधिकारियों का आरोप है कि वह नम्मा क्लिनिक में निर्धारित ड्यूटी से अनुपस्थित रहीं। अब जांच में यह देखा जाएगा कि उन्हें मिली अनुमति की शर्तें क्या थीं और क्या वह सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में अपनी जिम्मेदारियों का नियमित रूप से पालन कर रही थीं।
अनुशासनात्मक कार्रवाई और वेतन वसूली की चेतावनी
जिला पंचायत CEO ने नोटिस के माध्यम से संकेत दिया है कि आरोप सही पाए जाने पर डॉ. अंकिता यारगल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा सकती है। मामले को कर्नाटक मेडिकल काउंसिल और नेशनल मेडिकल कमीशन के समक्ष भी भेजे जाने की संभावना जताई गई है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि यदि नियमों के तहत दो जगह कार्य करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अवधि में प्राप्त वेतन या मानदेय की वसूली की कार्रवाई की जा सकती है।
अगली जांच में अनुपस्थिति पर एकतरफा फैसला संभव
प्रशासन ने डॉ. अंकिता यारगल को अगली जांच में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि वह निर्धारित तारीख और समय पर जांच में शामिल नहीं होती हैं, तो उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर एकतरफा निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
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