Karnataka Dharmasthala Case : कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में सामने आया धर्मस्थल कांड अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि यह पूरा मामला एक साजिश थी और मंदिर को बदनाम करने के लिए लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं। पुलिस ने शिकायतकर्ता पूर्व सफाईकर्मी चिन्नया को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मंदिर के पुजारी को पहले गिरफ्तारी के बाद छोड़ दिया गया है। वहीं, बेटी के गायब होने का दावा करने वाली सुजाता भट्ट ने भी अपनी शिकायत वापस ले ली है और माना कि उन्होंने गलत शिकायत दर्ज कराई थी।

मामला कैसे उठा और आरोप क्या थे?
यह विवाद 3 जुलाई को तब शुरू हुआ जब पूर्व सफाईकर्मी चिन्नया ने स्थानीय एसपी को छह पन्नों का एक शिकायत पत्र दिया। इसमें उसने आरोप लगाया कि 1995 से 2014 के बीच श्री धर्मस्थल मंजूनाथेश्वर मंदिर में मंदिर प्रशासन के कहने पर उसने सैकड़ों शव दफनाए हैं। साथ ही उसने मंदिर में कथित हत्या और यौन शोषण का भी आरोप लगाया। मामला और गंभीर तब हुआ जब सुजाता भट्ट ने दावा किया कि उनकी बेटी अनन्या साल 2003 में इसी मंदिर से गायब हो गई थी।

श्रद्धालुओं और समुदाय का विरोध
धर्मस्थल मंदिर कर्नाटक के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। मंदिर पर लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद स्थानीय लोगों और समुदायों में भारी रोष फैला। चिक्कमगलूरु, कोप्पल, मैसूरु, यादगिर, और कलबुर्गी जैसे शहरों में हजारों श्रद्धालुओं ने रैलियां निकालीं। इनमें विभिन्न समुदायों के नेता और आम लोग भी शामिल थे, जिन्होंने मंदिर के पक्ष में आवाज उठाई।
पुलिस जांच में बड़ा उलटफेर
एसआईटी की जांच में पता चला कि कथित गायब लड़की अनन्या का न तो किसी कॉलेज में नाम दर्ज था और न ही उसके बारे में परिचित या रिश्तेदारों को कोई जानकारी थी। इसके बाद सुजाता भट्ट ने स्वीकार किया कि उनकी कोई बेटी ही नहीं है। उन्होंने मीडिया को एक फर्जी तस्वीर भी दी थी। सुजाता ने बताया कि उनका मकसद मंदिर प्रशासन पर दबाव डालना था, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर उनके दादा की संपत्ति पर कब्जा किया था। हालांकि बाद में उन्होंने कर्नाटक के लोगों से माफी मांगी।
नेता प्रतिपक्ष का आरोप और साजिश का खुलासा
कर्नाटक विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष एमएलसी चलवाडी नारायणस्वामी ने कहा कि मुख्य साजिशकर्ता चिन्नया अब पकड़ा गया है। एसआईटी ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया है। उनका कहना है कि यह पूरी योजना हिंदू मंदिरों और प्रशासन को बदनाम करने के लिए रची गई थी। साथ ही उन्होंने कांग्रेस सरकार पर भी संदेह जताया कि वे इस साजिश में शामिल हो सकते हैं।
धर्मस्थल कांड की जांच ने साबित कर दिया है कि मंदिर को बदनाम करने के आरोप पूरी तरह से झूठे और संगठित साजिश का हिस्सा थे। यह मामला न सिर्फ धार्मिक भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि इस बात की भी पुष्टि करता है कि झूठे आरोपों से समाज में असामंजस्य फैलाने की कोशिश की जा रही है। इस कांड से यह भी स्पष्ट हो गया कि जांच एजेंसियों की पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई से सच सामने आ सकता है।
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