Karnataka Leadership
Karnataka Leadership: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच गुरुवार को उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से उनके आवास पर मुलाकात की। जैसे ही इस बैठक की खबर सामने आई, राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के भविष्य और शिवकुमार की संभावित पदोन्नति से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। हालांकि, शिवकुमार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए इसे एक औपचारिक और नीतिगत चर्चा का हिस्सा बताया।
मुलाकात के बाद जब मीडिया ने डीके शिवकुमार से सवाल किए, तो उन्होंने इसे पूरी तरह गैर-राजनीतिक बैठक करार दिया। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि चर्चा का मुख्य बिंदु केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाए जा रहे नए कानून से संबंधित था। उन्होंने बताया कि 27 दिसंबर को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की एक अहम बैठक होने वाली है, जिसमें पार्टी को इस गंभीर मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना है। इसी संदर्भ में वे पार्टी अध्यक्ष को राज्य की जमीनी स्थिति से अवगत कराने पहुँचे थे।
शिवकुमार ने मीडिया से बात करते हुए साफ तौर पर कहा कि बैठक में मुख्यमंत्री बदलने या किसी अन्य अंदरूनी राजनीतिक विवाद पर कोई बात नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मैंने अध्यक्ष महोदय के सामने कोई अन्य मुद्दा नहीं उठाया और न ही मुझे ऐसा करने की कोई आवश्यकता महसूस होती है।” शिवकुमार के इस बयान को पार्टी के भीतर एकता दिखाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, ताकि विपक्ष को सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाने का मौका न मिले।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच शक्ति संतुलन को लेकर अक्सर खबरें आती रहती हैं। इस पर टिप्पणी करते हुए शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री और वे दोनों ही पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मैंने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि हम कांग्रेस हाईकमान के हर फैसले का सम्मान करेंगे और उसका पालन करेंगे।” यह बयान संकेत देता है कि यदि आलाकमान भविष्य में कोई बदलाव करता भी है, तो राज्य नेतृत्व उसे स्वीकार करने के लिए तैयार है।
भले ही डीके शिवकुमार ने इसे मनरेगा से जुड़ी बैठक बताया हो, लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि 27 दिसंबर की CWC बैठक के हाशिए पर कर्नाटक के राजनीतिक भविष्य पर भी चर्चा हो सकती है। सिद्धारमैया सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के कुछ आरोपों और विपक्षी हमलों के बीच, पार्टी नेतृत्व राज्य में अपनी छवि को मजबूत बनाए रखना चाहता है। शिवकुमार की दिल्ली में सक्रियता यह दर्शाती है कि आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
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