Karnataka Politics
Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में पिछले कई महीनों से जारी मुख्यमंत्री पद के विवाद पर आखिरकार उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने अपनी खामोशी तोड़ी है। सोमवार को मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पार्टी आलाकमान की मौजूदगी में नेतृत्व के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने एक रहस्यमयी लहजे में कहा कि दोनों नेता एक निश्चित निष्कर्ष पर पहुँच चुके हैं, लेकिन राजनीति में हर निर्णय को सार्वजनिक करने का एक सही समय होता है। शिवकुमार के इस बयान ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को एक नई दिशा दे दी है, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच कौतूहल बढ़ गया है।
पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डेरा डाले हुए डीके शिवकुमार ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्हें राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खरगे से मिलने का समय नहीं मिला। बेंगलुरु लौटने के बाद उन्होंने तल्ख अंदाज में कहा, “अखबारों और टीवी में आ रही खबरें भ्रामक हैं। मैं राजनीतिक और सरकारी कामकाज के सिलसिले में दिल्ली जाता रहता हूँ। क्या मुझे हर मुलाकात की तस्वीरें दिखानी होंगी?” उन्होंने मीडिया के बदलते रुख पर चुटकी लेते हुए कहा कि कभी उन्हें बैठक करते दिखाया जाता है, तो कभी कहा जाता है कि मुलाकात ही नहीं हुई। उन्होंने साफ किया कि आलाकमान के साथ उनकी बातचीत बेहद सार्थक रही है।
अपनी ताकत का एहसास कराते हुए उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके पास मुख्यमंत्री सिद्धारमैया समेत सभी 140 विधायकों (कांग्रेस और सहयोगी) का पूरा समर्थन हासिल है। जब उनसे उनके भाई और पूर्व सांसद डीके सुरेश के उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने ‘जल्द अच्छी खबर’ मिलने की बात कही थी, तो शिवकुमार ने मुस्कराते हुए कहा, “मेरे भाई, पार्टी कार्यकर्ता और यहाँ तक कि आप (मीडिया) भी यही कह रहे हैं।” उन्होंने आगे जोड़ा कि उनके समर्थक उनसे बड़ी उम्मीदें रखते हैं और वे इन उम्मीदों से भली-भांति वाकिफ हैं, लेकिन वे अनुशासन के दायरे में रहकर ही काम करेंगे।
सिद्धारमैया और उनके बीच हुई बंद कमरे की चर्चा के बारे में पूछे जाने पर डीके शिवकुमार ने कूटनीतिक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “मैंने और मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और आलाकमान के सामने क्या चर्चा की और हमने मिलकर क्या निर्णय लिया है, यह मीडिया के सामने सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।” उन्होंने बार-बार ‘समय’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वक्त आने पर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। अप्रैल में किसी ‘बड़ी घोषणा’ की अटकलों पर उन्होंने बस इतना ही कहा, “देखते हैं, अभी से इस पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है।”
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं 20 नवंबर 2023 से ही तेज हैं, जब वर्तमान सरकार ने अपने ढाई साल का कार्यकाल पूरा किया था। 2023 में जब कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी, तब सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच ‘पावर-शेयरिंग’ (सत्ता-साझाकरण) समझौते की खबरें आई थीं। माना जा रहा है कि उस समझौते के तहत कार्यकाल के दूसरे हिस्से में डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी जानी थी। अब जबकि शिवकुमार ने खुद ‘निष्कर्ष’ पर पहुँचने की बात कही है, तो राजनीतिक विश्लेषक इसे अप्रैल 2026 में होने वाले संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
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