Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और इस बार यह पर्व 9 अक्टूबर 2025 को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। लेकिन इस कठिन व्रत की शुरुआत होती है ‘सरगी’ से, जो न सिर्फ ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि सास-बहू के रिश्ते की मिठास का भी प्रतीक है।

क्या होती है सरगी?
सरगी करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले खाई जाने वाली एक विशेष थाली होती है, जिसे आमतौर पर सास अपनी बहू को देती हैं। इसमें फलों, मिठाइयों, मठरी, सेवई, नारियल, मेवे, सूखे फल और श्रृंगार का सामान शामिल होता है। इसे ब्रह्म मुहूर्त में खाया जाता है ताकि व्रती महिला पूरे दिन बिना जल के रहकर भी स्वस्थ और ऊर्जावान बनी रहे।

यह न सिर्फ एक पौष्टिक आहार है, बल्कि इसमें सास के आशीर्वाद और प्रेम की भी झलक मिलती है। यही वजह है कि करवा चौथ की तैयारियों में सरगी का विशेष स्थान होता है।
पहली बार करवा चौथ व्रत रख रही महिलाओं के लिए टिप्स
अगर आप पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने जा रही हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
1. सरगी समय पर खाएं
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ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) सरगी का सबसे शुभ समय होता है।
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सरगी में पानी, फल, हल्की मिठाई और मेवे जरूर लें ताकि पूरे दिन कमजोरी न महसूस हो।
2. शुभ रंग पहनें
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करवा चौथ पर लाल, पीला, गुलाबी या हरा रंग पहनना शुभ माना जाता है।
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ये रंग वैवाहिक जीवन की खुशहाली और प्रेम का प्रतीक होते हैं।
3. पूजा विधि और कथा
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करवा माता की पूजा कर करवा चौथ व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।
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मिट्टी के करवे में चावल, पानी और दीपक रखकर देवी को अर्घ्य अर्पित करें।
4. चंद्रमा को अर्घ्य दें
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चांद निकलने पर छलनी से चंद्र दर्शन करें, पति को देखें और उन्हें जल पिलाएं।
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इसके बाद ही व्रत का पारण करें।
ध्यान देने योग्य बातें
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व्रत के दौरान मन और वचन दोनों से संयम रखें।
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काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से परहेज करें।
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किसी से झगड़ा या कटु वचन न बोलें, सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें।
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घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें।
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व्रत का उद्देश्य प्रेम, समर्पण और आस्था है, इसे पूरी श्रद्धा से निभाएं।
करवा चौथ का व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और परिवार की एकता का पर्व है। सरगी इस व्रत की आत्मा है, जो इस विशेष दिन की शुरुआत प्रेम, आशीर्वाद और सकारात्मकता से करती है। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं इन बातों को ध्यान में रखें और इस पावन दिन को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाएं।
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