Keir Starmer Resigns: ब्रिटेन की राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बड़ा और अप्रत्याशित फैसला लिया है। प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के महज 71 दिन बाद उन्होंने सांसद का पद भी छोड़ने का ऐलान कर दिया। स्टार्मर ने कहा कि अब वह राजनीति के कुछ दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय मामले, रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और तकनीक के साथ-साथ महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा रोकने जैसे मुद्दे शामिल हैं। उनके इस निर्णय को ब्रिटिश राजनीति में असामान्य घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
11 साल तक होलबोर्न एंड सेंट पैनक्रास का किया प्रतिनिधित्व
कीर स्टार्मर वर्ष 2015 से लंदन की होलबोर्न एंड सेंट पैनक्रास संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। यह सीट लंबे समय से लेबर पार्टी का मजबूत राजनीतिक गढ़ मानी जाती है। 2024 के आम चुनाव में स्टार्मर ने इस सीट से 11 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। प्रधानमंत्री पद छोड़ते समय उन्होंने संकेत दिया था कि वह 2029 में प्रस्तावित अगले आम चुनाव तक सांसद बने रहेंगे। इसलिए अब अचानक सांसद पद छोड़ने की घोषणा ने राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज कर दी हैं।
नए उत्तराधिकारी को जिम्मेदारी सौंपना चाहते हैं स्टार्मर
स्थानीय अखबार Camden New Journal से बातचीत में स्टार्मर ने कहा कि इस क्षेत्र का 11 वर्षों तक प्रतिनिधित्व करना उनके लिए सम्मान और गर्व की बात रही है। हालांकि, अब उन्हें लगता है कि यह जिम्मेदारी किसी नए उत्तराधिकारी को सौंपने का उचित समय आ गया है। उन्होंने कहा कि सांसद के रूप में उनका कार्यकाल उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, लेकिन आगे वह अलग क्षेत्रों में योगदान देना चाहते हैं। उनके मुताबिक अब उनकी प्राथमिकताएं बदल रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों और महिलाओं की सुरक्षा पर रहेगा फोकस
स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि सांसद पद छोड़ने के बाद भी वह सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह अलग नहीं होंगे। उनका ध्यान डिफेंस, सिक्योरिटी, ट्रेड और टेक्नोलॉजी सहित अंतरराष्ट्रीय मामलों पर रहेगा। इसके अलावा महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को रोकना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि वह सांसद बनने से पहले भी इस मुद्दे पर काम करते रहे हैं और भविष्य में भी इस दिशा में अपना योगदान जारी रखना चाहते हैं।
होलबोर्न सीट पर उपचुनाव की तैयारी होगी शुरू
स्टार्मर के सांसद पद से हटने के फैसले के बाद अब होलबोर्न एंड सेंट पैनक्रास सीट पर उपचुनाव का रास्ता साफ होगा। हालांकि उपचुनाव की तारीख तत्काल घोषित नहीं की जा सकती। इसके लिए पहले स्टार्मर को हाउस ऑफ कॉमन्स से औपचारिक रूप से इस्तीफा देना होगा। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लेबर पार्टी के मजबूत गढ़ में होने वाला यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विपक्षी दल इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
कंजर्वेटिव पार्टी ने फैसले पर उठाए सवाल
स्टार्मर के निर्णय को लेकर कंजर्वेटिव पार्टी ने उन पर निशाना साधा है। पार्टी के चेयरमैन केविन हॉलिनरेक्स ने उनके फैसले को एक और यू-टर्न बताया। उन्होंने कहा कि स्टार्मर ने पहले सांसद बने रहने का वादा किया था, लेकिन अब अपने फैसले से उन्होंने उस प्रतिबद्धता को बदल दिया है। कंजर्वेटिव पार्टी का आरोप है कि इस फैसले के कारण करदाताओं पर उपचुनाव कराने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
ग्रीन पार्टी से मिल सकती है लेबर को चुनौती
होलबोर्न एंड सेंट पैनक्रास में आगामी उपचुनाव के दौरान लेबर पार्टी को ग्रीन पार्टी से मजबूत चुनौती मिलने की संभावना जताई जा रही है। हाल के स्थानीय चुनावों के आंकड़ों में लेबर पार्टी को लगभग 39.5 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि ग्रीन पार्टी का वोट शेयर करीब 29.8 प्रतिशत रहा। ऐसे में ग्रीन पार्टी इस सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। पार्टी नेता जैक पोलांस्की के भी चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है।
पिछले प्रधानमंत्रियों से अलग है स्टार्मर का फैसला
स्टार्मर का सांसद पद छोड़ने का फैसला ब्रिटेन के हालिया पूर्व प्रधानमंत्रियों की तुलना में काफी अलग है। ऋषि सुनक प्रधानमंत्री पद छोड़ने के करीब दो साल बाद भी सांसद बने हुए हैं। लिज ट्रस ने भी 2024 के आम चुनाव तक सांसद के रूप में काम किया था। थेरेसा मे प्रधानमंत्री पद छोड़ने के लगभग पांच साल बाद तक संसद में रहीं। इसके विपरीत बोरिस जॉनसन और डेविड कैमरन ने प्रधानमंत्री पद छोड़ने के कुछ समय बाद हाउस ऑफ कॉमन्स से इस्तीफा दे दिया था।
71 दिन में सांसद पद छोड़ना बना अहम राजनीतिक घटनाक्रम
प्रधानमंत्री पद छोड़ने के केवल 71 दिन बाद सांसद पद से भी हटने का स्टार्मर का निर्णय ब्रिटेन की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका खत्म नहीं होगी और वह अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम जारी रखेंगे। अब सबकी नजर होलबोर्न एंड सेंट पैनक्रास के संभावित उपचुनाव पर होगी, जहां लेबर पार्टी को अपनी पारंपरिक मजबूत पकड़ बनाए रखने की चुनौती मिलेगी।
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