Ken Betwa Project Protest : मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में बांध परियोजनाओं और केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। प्रभावित ग्रामीणों को आशंका है कि इन परियोजनाओं के कारण 50 हजार से अधिक लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है। आंदोलन से जुड़े लोगों के मुताबिक, प्रभावित आबादी में लगभग 60 प्रतिशत लोग आदिवासी समुदाय से हैं। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उनकी जमीन, आजीविका, अधिकारों और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए। इसी बीच ऑल इंडिया एग्रीकल्चरल रूरल वर्कर्स यूनियन (AARM) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), यानी CPI(M), ने प्रभावित परिवारों के संघर्ष को समर्थन दिया है।

दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे वामपंथी नेताओं ने सुनी समस्याएं
AARM और CPI(M) के प्रतिनिधिमंडल ने दो दिनों तक पन्ना और छतरपुर के विभिन्न गांवों का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल में बृंदा करात, दुलीचंद मीणा, जसविंदर सिंह और राम नारायण कुरारिया शामिल रहे। नेताओं ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास से संबंधित उनकी चिंताओं को सुना। उन्होंने जय किसान संगठन के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई और ग्रामीणों को उनके अधिकारों की लड़ाई में सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

28 दिन की भूख हड़ताल के बाद अमित भटनागर से मुलाकात
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर भी इस दौरान मौजूद रहे। उन्होंने हाल ही में 28 दिनों तक भूख हड़ताल करने के बाद अपना अनशन समाप्त किया था। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि उनके खिलाफ दर्ज कई मामले आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीणों की मांगों, आंदोलन की स्थिति और परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा की।
पन्ना जेल में दलित महिला नेता दिव्या अहिरवार से मिले नेता
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पन्ना जेल में 24 वर्षीय दलित महिला नेता दिव्या अहिरवार से भी मुलाकात की। उन्हें हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रतिनिधिमंडल और आंदोलन से जुड़े लोगों ने मामले को कथित तौर पर झूठा बताते हुए गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। इस संबंध में आरोपों और कानूनी कार्रवाई की वास्तविक स्थिति जानने के लिए पुलिस तथा न्यायिक रिकॉर्ड की पुष्टि आवश्यक है।
चिता आंदोलन और जल सत्याग्रह से जताया विरोध
अजयगढ़ क्षेत्र के बहननरी टपरियां गांव में प्रभावित परिवार मझगवां और रुनझ परियोजनाओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने प्रतीकात्मक चिताओं, गले में फंदे डालकर प्रदर्शन और जल सत्याग्रह जैसे तरीकों से अपनी नाराजगी जताई है। उनका नारा ‘न्याय दो या मार दो’ उनकी मांगों को लेकर गंभीरता दर्शाता है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी बात सुने बिना परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से उनके जीवन और भविष्य पर संकट बढ़ सकता है।

बढ़ते जलस्तर, मुआवजे और पुनर्वास पर सवाल
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि जलस्तर बढ़ने से घरों और खेती की जमीन पर खतरा मंडरा रहा है। उनका कहना है कि मुआवजे के पात्र कुछ परिवारों को सूची से बाहर रखा गया है और पुनर्वास की प्रक्रिया में देरी हो रही है। आंदोलनकारियों ने वन अधिकार अधिनियम और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के पालन की मांग की है।
जिला प्रशासन ने जनसुनवाई का दिया आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल ने नवनियुक्त जिला मजिस्ट्रेट से मुलाकात कर प्रभावित परिवारों की समस्याएं उठाईं। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, जिला प्रशासन ने शिकायतें सुनने और मुद्दों पर चर्चा के लिए जनसुनवाई आयोजित करने का आश्वासन दिया है। CPI(M) के मध्य प्रदेश राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने भी आंदोलन को हरसंभव सहयोग देने की बात कही। अब प्रभावित ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक सुनवाई और पुनर्वास संबंधी फैसलों पर टिकी हैं।
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