MP Blackbuck Rescue : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 28 अक्टूबर को शाजापुर जिले के रंथभंवर गांव पहुंचे। यहां उन्होंने कृष्णमृगों यानी काले हिरणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के दूसरे चरण का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति, व्यवस्थाओं तथा वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान से बोमा पद्धति के माध्यम से किए जा रहे रेस्क्यू कार्य को भी देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद वन विभाग और प्रशासन की टीम के साथ समूह तस्वीर भी खिंचवाई।

किसानों की फसलों को बचाने के लिए विशेष अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाया जाए। उन्होंने बताया कि काले हिरणों और नीलगायों से फसलों को होने वाली क्षति को ध्यान में रखते हुए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए अफ्रीका से विशेषज्ञों की एक टीम बुलाई गई है, जो वन विभाग को कृष्णमृगों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने में सहयोग कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया में पशुओं को चोट से बचाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बोमा पद्धति से कृष्णमृगों को सुरक्षित पकड़ने की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान में बोमा पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक में वन्यजीवों को निर्धारित रास्ते और घेरे की मदद से सुरक्षित स्थान तक लाया जाता है, जहां से उन्हें सावधानीपूर्वक पकड़ा जाता है। अधिकारियों की निगरानी में पशु चिकित्सकों और आवश्यक उपकरणों की मदद से पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस अभियान में हेलीकॉप्टर की सहायता का भी इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने इसे दक्षिण एशिया में अपनी तरह का विशेष प्रयास बताया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित विभाग के आधिकारिक विवरण को देखना आवश्यक है।
अब तक 1,236 कृष्णमृगों को पकड़ने की जानकारी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार अभियान के तहत अब तक लगभग 1,236 काले हिरणों को पकड़ा जा चुका है। इन वन्यजीवों को श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना और उन क्षेत्रों में फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना है, जहां किसान जंगली जानवरों की समस्या से परेशान हैं। वन्यजीवों को स्थानांतरित करते समय उनकी सेहत, परिवहन और नए आवास की उपयुक्तता का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।
11 ट्रकों और पशु चिकित्सकों की मदद से परिवहन
मुख्यमंत्री ने बताया कि कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। इस कार्य में पशु चिकित्सक, वन विभाग के कर्मचारी और आवश्यक उपकरण लगाए गए हैं। उन्होंने अभियान में शामिल टीम की सराहना करते हुए कहा कि जानवरों को बिना चोट पहुंचाए पकड़ना और उनका सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री को उम्मीद है कि अभियान सफल होने पर दूसरे राज्य और अन्य देश भी इस पद्धति को अपना सकते हैं।

वन्यजीव संरक्षण और किसान कल्याण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसान कल्याण, युवाओं के रोजगार और प्रकृति तथा वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है। कृष्णमृग रेस्क्यू अभियान को उन्होंने किसानों की फसलों की रक्षा और वन्यजीवों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की पहल बताया। अभियान की सफलता का आकलन आगे के परिणामों, पशुओं की स्थिति और किसानों को होने वाले लाभ के आधार पर किया जाएगा।

