Iran Israel War
Iran Israel War: मध्य पूर्व के रणक्षेत्र से एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने 5 मार्च 2026 को एक टेलीविजन इंटरव्यू में स्वीकार किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने का फैसला रातों-रात नहीं लिया गया था। इसकी विस्तृत पटकथा लगभग तीन महीने पहले ही लिख दी गई थी। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और इजरायल-अमेरिका गठबंधन के बीच भीषण युद्ध छिड़ा हुआ है।
रक्षा मंत्री काट्ज ने ‘चैनल 12 टीवी’ को बताया कि इस ऐतिहासिक और आक्रामक ऑपरेशन की नींव नवंबर 2025 में रखी गई थी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक अत्यंत गोपनीय और चुनिंदा सुरक्षा अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक का एकमात्र और स्पष्ट एजेंडा था—ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का अंत। इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसकी उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताएं अब इजरायल के अस्तित्व के लिए असहनीय खतरा बन चुकी हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया था कि इस खतरे को जड़ से मिटाने के लिए नेतृत्व को ही निशाना बनाना अनिवार्य है।
मूल योजना के मुताबिक, इस सैन्य ऑपरेशन को साल 2026 के मध्य में अंजाम दिया जाना था। हालांकि, जनवरी 2026 में ईरान के आंतरिक हालातों ने इजरायल को अपनी रणनीति समय से पहले लागू करने पर मजबूर कर दिया। उस दौरान ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इजरायल को अंदेशा था कि आंतरिक दबाव से ध्यान भटकाने के लिए ईरानी नेतृत्व इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर बड़ा हमला कर सकता है। काट्ज के अनुसार, “हम नहीं चाहते थे कि ईरान पहल करे,” इसलिए योजना को प्री-पोन किया गया और इसमें अमेरिका को भी साझीदार बनाया गया।
पूरी तैयारी के बाद, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एक व्यापक और सटीक हवाई अभियान शुरू किया। यह हमला इतना भीषण था कि कुछ ही घंटों में अयातुल्ला अली खामेनेई अपने आधिकारिक परिसर में मारे गए। रिपोर्टों के अनुसार, जिस इमारत को निशाना बनाया गया, वहां खामेनेई के साथ ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर भी मौजूद थे। आधुनिक इतिहास में यह अपनी तरह की पहली घटना है जब किसी संप्रभु राष्ट्र के सर्वोच्च नेता को दूसरे देशों ने सीधे हवाई हमले में ढेर कर दिया हो।
खामेनेई की मौत के बावजूद इजरायल का सैन्य अभियान थमा नहीं है। रक्षा मंत्री काट्ज ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि इजरायल का उद्देश्य सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि ईरान की सैन्य रीढ़ को तोड़ना है। उनका मुख्य लक्ष्य ईरान के परमाणु हथियार ठिकानों और मिसाइल प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह जमींदोज करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान का नया नेतृत्व भी इजरायल विरोधी विचारधारा रखता है, तो उसे भी वही अंजाम भुगतना होगा। इजरायल अब अपनी सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
इस हमले ने पूरे मध्य पूर्व को एक विनाशकारी युद्ध में झोंक दिया है। पिछले एक हफ्ते से जारी इस जंग के जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागी हैं। इजरायल ने भी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं चिंतित हैं। फिलहाल, न तो तेहरान झुकने को तैयार है और न ही वाशिंगटन और यरूशलेम अपने कदम पीछे खींचने का संकेत दे रहे हैं। यह संघर्ष दशकों पुरानी रंजिश का सबसे खूनी अध्याय बन चुका है।
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