SC Judges Bill: मानसून सत्र के 17वें दिन बुधवार (5 अगस्त, 2026) को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में न्यायपालिका से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी मिल गई। राज्यसभा ने विस्तृत चर्चा के बाद उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा से भी मंजूर हो चुका था। अब संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेगा।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़कर होगी 38
इस संशोधन विधेयक में सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित कुल 34 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या है। नए कानून के लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी। सरकार का कहना है कि जजों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

राज्यसभा में विधेयक पेश होने के दौरान विपक्ष का हंगामा
लोकसभा से पारित होने के बाद केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बुधवार को राज्यसभा में इस विधेयक को चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। हालांकि, विधेयक को सदन की मंजूरी मिलने की प्रक्रिया हंगामे से प्रभावित रही। राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित होने के बाद दोपहर दो बजे दोबारा शुरू हुई।जब कानून मंत्री ने विधेयक को सदन में पेश किया, तो कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे और सदन में जोरदार हंगामा किया।
विपक्षी दलों ने मुद्दों को लेकर जताया विरोध
विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोप और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। इन मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए विपक्ष ने सदन की कार्यवाही बाधित करने की कोशिश की। हंगामे के बीच राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विधेयक पर चर्चा शुरू कराई।
चर्चा शुरू होते ही विपक्ष का वॉकआउट
विधेयक पर चर्चा शुरू होने के बाद कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ समय बाद कई विपक्षी दलों के सदस्य सदन में वापस लौट आए और उन्होंने विधेयक पर अपनी बात रखी।वापस आने वाले दलों में तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सांसद शामिल थे। इन दलों के सदस्यों ने चर्चा में भाग लेते हुए अपनी राय रखी।

कानून मंत्री ने बताया न्यायिक सुधारों की दिशा में कदम
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे न्यायिक सुधारों की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से मामलों के निपटारे की गति बढ़ेगी और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने में मदद मिलेगी।कानून मंत्री ने कहा कि यह विधेयक न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए किए जा रहे सुधारों की श्रृंखला का हिस्सा है। न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की आवश्यकता है।
1950 से अब तक बढ़ती गई सुप्रीम कोर्ट की क्षमता
अर्जुन राम मेघवाल ने चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1950 में जब देश के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना हुई थी, तब मुख्य न्यायाधीश सहित कुल आठ न्यायाधीशों की व्यवस्था थी। समय के साथ बढ़ते मुकदमों और न्यायिक जरूरतों को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या में लगातार वृद्धि की गई।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में न्यायिक कार्यभार काफी बढ़ चुका है, इसलिए जजों की संख्या बढ़ाना आवश्यक हो गया है। नए प्रावधान से सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ाने और लंबित मामलों के जल्द समाधान में मदद मिलने की उम्मीद है।
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