Kishtwar Cloudburst 2025: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोती इलाके में गुरुवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही हुई। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के दो जवान भी शहीद हुए हैं। बाढ़ के अचानक आने से मचैल माता मंदिर के यात्रा मार्ग पर भारी पत्थर, मलबा और पानी का सैलाब आ गया, जिससे लोगों को बचाव के लिए कोई मौका नहीं मिला।



आपदा का समय और स्थल
यह आपदा 25 जुलाई से शुरू हुई मचैल माता यात्रा के दौरान हुई, जो 5 सितंबर तक चलने वाली थी। दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर चशोती गांव के पास अचानक बादल फटा और कुछ ही मिनटों में पानी, मलबा और पत्थरों का सैलाब मचैल माता मंदिर के रास्ते पर आया। मंदिर 9500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां श्रद्धालु मोटर वाहन से चशोती गांव तक पहुंचते हैं और फिर 8.5 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हैं।
नुकसान और बचाव कार्य
बाढ़ ने 16 आवासीय घर, सरकारी इमारतें, तीन मंदिर, चार पवनचक्की, एक पुल और दर्जनों वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। साथ ही चशोती गांव में स्थित लंगर का सामुदायिक रसोईघर भी भारी प्रभावित हुआ। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), पुलिस, सेना और स्थानीय वॉलंटियर्स राहत कार्य में जुटे हैं। बड़े पत्थरों और मलबे को हटाने के लिए खुदाई मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। घायलों को किश्तवाड़ जिला अस्पताल और पड्डार उप-जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां 37 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस त्रासदी के बाद 15 अगस्त को होने वाली एट होम चाय पार्टी और स्वतंत्रता दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन बचाव कार्य में पूरी ताकत लगा रहा है और एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गई हैं।
अलर्ट और भविष्य की तैयारी

प्रशासन ने पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है। सर्चलाइट, रस्सियाँ, और खुदाई के औज़ार राहत सामग्री के रूप में आगे बढ़ाए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन जारी हैं ताकि लापता लोगों को ढूंढ़ा जा सके। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।
किश्तवाड़ की यह आपदा एक बड़ी त्रासदी है जिसने कई परिवारों को तहस-नहस कर दिया है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार बचाव कार्य कर रही हैं। देश को इस आपदा में मृतकों के प्रति संवेदनाएं प्रकट करते हुए, हम सभी को सावधानी और सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
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