Astro Roti Remedies
Astro Roti Remedies : संसार में प्रत्येक मनुष्य की यही इच्छा होती है कि उसका जीवन हमेशा सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण रहे। वह चाहता है कि दुर्भाग्य और परेशानियां कभी उसके जीवन में दस्तक न दें, लेकिन कई बार ग्रहों के अशुभ प्रभाव या कुंडली दोष के कारण व्यक्ति को न चाहते हुए भी मानसिक और आर्थिक तंगियों का सामना करना पड़ता है। यदि आप भी वर्तमान में ऐसी ही किसी बड़ी समस्या या दुर्भाग्य से जूझ रहे हैं, तो आपके घर की रसोई (किचन) में बनने वाली साधारण रोटी आपकी इन बाधाओं को दूर करने में एक अचूक और मार्गदर्शक भूमिका निभा सकती है। ज्योतिष शास्त्र में रोटी से जुड़े कई ऐसे कल्याणकारी उपायों का वर्णन मिलता है, जो सोई हुई किस्मत को जगाने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में सक्षम हैं।
हिंदू सनातन धर्म और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, घर में सुख-समृद्धि और शांति बनाए रखने के लिए प्रतिदिन सुबह भोजन बनाते समय पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालनी चाहिए। इस रोटी पर थोड़ा सा घी या गुड़ रखकर गौमाता को खिलाने से न केवल पितृदोष से मुक्ति मिलती है, बल्कि घर में चल रही पारिवारिक कलह और तनाव भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं। यह उपाय परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम, आदर और सामंजस्य की भावना को मजबूत करता है, जिससे घर का वातावरण हमेशा खुशनुमा और सकारात्मक बना रहता है।
यदि आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर बिगड़ जाते हैं या व्यापार और नौकरी में लगातार रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है, तो ज्योतिष शास्त्र में इसके लिए एक बहुत ही प्रभावी उपाय बताया गया है। इसके अंतर्गत आपको एक ताजा रोटी को अच्छी तरह से चूर-चूर (महीन) कर लेना है और उसमें थोड़ी सी चीनी या बूरा मिला लेना है। इस मिश्रण को प्रतिदिन चीटियों के बिल के पास डालना चाहिए। माना जाता है कि चीटियों को अन्न दान करने से जीवन के बड़े से बड़े अवरोध स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं और अटके हुए कार्यों को गति मिलती है।
कुंडली में शनि, राहु या केतु जैसे क्रूर ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा या कुदृष्टि के कारण जीवन में अचानक परेशानियां, बीमारियां और अनचाहे आर्थिक नुकसान होने लगते हैं। इन तीनों ग्रहों के अशुभ प्रभावों और कष्टों से शीघ्र मुक्ति पाने के लिए शनिवार के दिन एक विशेष उपाय करना चाहिए। शनिवार को शाम के समय एक रोटी पर शुद्ध सरसों का तेल लगाएं और उसे किसी काले कुत्ते को खिला दें। कुत्ता भगवान भैरव का वाहन माना जाता है और उसे तेल लगी रोटी देने से शनि और राहु-केतु जनित सभी दोष और बाधाएं अत्यंत शीघ्र शांत हो जाती हैं।
यदि आपका भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है और आर्थिक तंगी खत्म होने का नाम नहीं ले रही, तो सुबह की पहली रोटी का यह महाउपाय आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। सुबह किचन में बनी पहली रोटी पर थोड़ा सा शुद्ध देसी घी लगाएं और उसके चार बराबर टुकड़े कर लें। अब इन चारों टुकड़ों को क्रमशः इस प्रकार अर्पित करें: पहला टुकड़ा गाय के लिए, दूसरा टुकड़ा गली के कुत्ते के लिए, तीसरा टुकड़ा कौए या पक्षियों के लिए और चौथा टुकड़ा किसी भूखे या जरूरतमंद व्यक्ति को कुछ मीठे (गुड़ या मिठाई) के साथ आदरपूर्वक दे दें। यह पंचबलि यज्ञ के समान माना जाता है, जो दरिद्रता का नाश कर गुडलक को आकर्षित करता है।
ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, किचन में कभी भी रोटियों को गिनकर नहीं बनाना चाहिए और न ही किसी को भोजन परोसते समय थाली में एक साथ तीन रोटियां रखनी चाहिए। चूंकि गेहूं का सीधा संबंध सूर्य देव से माना जाता है, इसलिए रोटियों की गिनती करना सूर्य देव का अपमान समझा जाता है, जिससे घर की बरकत चली जाती है। वहीं दूसरी ओर, शास्त्रों में थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसने की सख्त मनाही है, क्योंकि ऐसा केवल मृतकों के श्राद्ध या भोग के समय ही किया जाता है। जीवित व्यक्ति को हमेशा दो या चार की संख्या में ही रोटियां परोसनी चाहिए।
यदि घर के किसी सदस्य या बच्चे को अचानक बुरी नजर लग गई हो, जिसके कारण उसका स्वास्थ्य बिगड़ रहा हो या चिड़चिड़ापन बढ़ गया हो, तो रोटी का यह तांत्रिक उपाय बहुत कारगर है। एक सादी रोटी लें और उस पर थोड़ा सा सरसों का तेल, साबुत या पिसी लाल मिर्च और थोड़ा सा नमक रख लें। अब इस रोटी को नजर लगे व्यक्ति के सिर से पैर तक घड़ी की दिशा (Clockwise) में सात बार वार (उतार) लें। इसके बाद बिना पीछे मुड़े इस रोटी को किसी सुनसान चौराहे पर रख आएं। ऐसा करने से नजर दोष तत्काल दूर हो जाता है।
ज्योतिष और हिंदू परंपराओं के अनुसार, वर्ष में कुछ ऐसे विशेष दिन और त्योहार निर्धारित किए गए हैं, जिनमें रसोई में तवे पर रोटी बनाना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, परिवार में किसी की मृत्यु हो जाने पर (शोक के समय), नागपंचमी, दीपावली की रात, शीतला अष्टमी (बासोड़ा) और शरद पूर्णिमा के पावन दिन पर घर में रोटी नहीं सेकनी चाहिए। इन विशिष्ट तिथियों पर रोटी बनाने से घर में वैचारिक मतभेद, बीमारियां और दुख-दुर्भाग्य बढ़ने की आशंका प्रबल हो जाती है; इन दिनों पूड़ी, हलवा या अन्य सात्विक पकवान बनाने का विधान है।
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