Junk Food Health
Junk Food Health : आजकल के दौर में बच्चों के खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। यदि आपका बच्चा भी चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, बर्गर और पिज्जा जैसी चीजों का दीवाना है, तो यह खबर आपको सतर्क करने वाली है। एक नई और चौंकाने वाली रिसर्च में यह सामने आया है कि इन चीजों का अत्यधिक सेवन न केवल बच्चों के पेट को खराब करता है, बल्कि उन्हें अस्थमा (दमा) जैसी गंभीर सांस की बीमारी के मुहाने पर भी धकेल रहा है। आधुनिक जीवनशैली में इन खाद्य पदार्थों को बच्चों के लिए एक आसान विकल्प मान लिया गया है, लेकिन इनके भीतर छिपे नुकसान बच्चों के शारीरिक विकास को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं।
इस विषय पर गहराई से अध्ययन करने के लिए स्पेन में ‘सैंडो प्रोजेक्ट’ के तहत एक विस्तृत शोध किया गया। इस वैज्ञानिक रिसर्च में 4 से 5 साल की उम्र के लगभग 700 बच्चों को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने इन बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी जीवनशैली पर करीब 4 साल तक लगातार पैनी नजर रखी। इस लंबे फॉलो-अप के दौरान बच्चों के दैनिक खानपान के पैटर्न, उनकी डाइट में शामिल खाद्य पदार्थों और उनके स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों का बारीकी से विश्लेषण किया गया। रिसर्च के अंत में जो नतीजे सामने आए, उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है।
सैंडो प्रोजेक्ट की इस रिसर्च में इस बात का वैज्ञानिक कारण भी समझाया गया है कि आखिर ये अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड बच्चों के फेफड़ों को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब बच्चे इन रसायनों से युक्त भोजन का सेवन करते हैं, तो यह सीधे तौर पर उनके पेट के ‘गट माइक्रोबायोम’ (आंतों के अच्छे बैक्टीरिया) के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देता है। पेट का स्वास्थ्य बिगड़ने का सीधा असर बच्चे के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है। इससे शरीर में ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ बढ़ने लगता है, जो फेफड़ों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है और अंततः अस्थमा के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
इस शोध में एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा भी सामने आया है, जो यह दर्शाता है कि इन चीजों को खाने की मात्रा का बीमारी से क्या संबंध है। रिसर्च के अनुसार, जिन बच्चों ने बहुत कम मात्रा में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का सेवन किया था, उनमें अस्थमा का रिस्क केवल 3 फीसदी देखा गया। वहीं, जो बच्चे मध्यम मात्रा में इन चीजों को खा रहे थे, उनमें यह खतरा बढ़कर 10 फीसदी हो गया। सबसे डरावनी स्थिति उन बच्चों की रही जो बहुत ज्यादा मात्रा में चिप्स, नूडल्स और बर्गर खाते थे; ऐसे बच्चों में अस्थमा का खतरा 17 फीसदी तक दर्ज किया गया। यानी बच्चा जितना ज्यादा प्रोसेस्ड फूड खाएगा, खतरा उतना ही बड़ा होगा।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसे स्वादिष्ट बनाने के लिए फैक्ट्रियों में अत्यधिक प्रोसेसिंग की जाती है। इस प्रक्रिया में कई तरह के हानिकारक केमिकल्स, प्रिजर्वेटिव्स (परिरक्षक), आर्टिफिशियल फ्लेवर और एडिटिव्स मिलाए जाते हैं। ये सभी तत्व बच्चों की नाजुक आंतों के लिए बेहद नुकसानदेह होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन रसायनों के नियमित सेवन से बच्चों को बचपन में ही पेट की गंभीर बीमारियां, कब्ज और एसिडिटी होने लगती है। इतना ही नहीं, लंबे समय तक इन चीजों को खाते रहने से भविष्य में आंतों के कैंसर (कोलोन कैंसर) का खतरा भी काफी हद तक बढ़ जाता है।
यदि आप अपने बच्चों को इस बड़े खतरे से बचाना चाहते हैं, तो उनकी दैनिक डाइट में तुरंत सुधार करना बेहद आवश्यक है। हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए निम्नलिखित बदलावों की सिफारिश की है:
ताजे फल और सब्जियां: बच्चों को पैकेट बंद चिप्स के बजाय मौसमी ताजे फल और हरी सब्जियां खाने की आदत डालें।
घर का बना शुद्ध खाना: बाहर के बर्गर-पिज्जा की जगह घर पर ही गेहूं या सूजी से बने पौष्टिक स्नैक्स तैयार करें।
दाल, दूध और प्रोटीन: बच्चों के शारीरिक विकास के लिए उनकी डाइट में दालें, दूध, पनीर और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।
साबुत अनाज: दलिया, ओट्स और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर साबुत अनाज को उनके नाश्ते का हिस्सा बनाएं।
कम चीनी और कम पैकेज्ड फूड: बच्चों के भोजन में रिफाइंड चीनी की मात्रा को कम करें और डिब्बाबंद जूस या कोल्ड ड्रिंक्स से उन्हें पूरी तरह दूर रखें।
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