Middle East War
Middle East War: मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध अब विनाशकारी मोड़ ले चुका है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में अब तक कम से कम 1,332 लोगों की जान जा चुकी है। यह संघर्ष अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। हताहतों की संख्या के मामले में ईरान सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है, लेकिन इस युद्ध की आग ने पड़ोसी देश लेबनान को भी अपनी चपेट में ले लिया है। इजरायली बमबारी ने लेबनान के रिहायशी इलाकों और शहरों को मलबे में तब्दील करना शुरू कर दिया है, जिससे निर्दोष नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच बढ़ते टकराव ने लेबनान में एक बड़ी मानवीय त्रासदी को जन्म दिया है। लेबनान के सामाजिक मामलों के मंत्री (Social Affairs Minister) हनीन सईद ने एक प्रेस ब्रीफिंग में चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए हैं। उनके अनुसार, हालिया संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 5,17,000 से अधिक लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, इनमें से लगभग 1,17,228 लोग विभिन्न सरकारी आश्रय स्थलों (Shelters) में शरण लिए हुए हैं। यह स्थिति उस देश के लिए अत्यंत चिंताजनक है जो पहले से ही गहरे आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है।
इजरायल ने लेबनान में अपने सैन्य अभियान को और अधिक आक्रामक बना दिया है। पहली बार इजरायली वायुसेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत के मध्य हिस्से को निशाना बनाया है। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में ही 394 लोगों की मौत हो चुकी है। इस संघर्ष की सबसे दर्दनाक तस्वीर यह है कि मृतकों में 83 बच्चे और 42 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा, राहत और बचाव कार्य में जुटे 9 बचावकर्मियों ने भी अपनी जान गंवाई है। युद्ध की यह तपिश अब लेबनान के गांवों से निकलकर आधुनिक शहरी बस्तियों तक पहुँच चुकी है।
इस युद्ध का दूसरा मोर्चा इजरायल के भीतर खुला हुआ है। ईरान अपनी मिसाइल शक्ति का उपयोग करते हुए इजरायल पर लगातार जवाबी हमले कर रहा है। हालांकि इजरायल के डिफेंस सिस्टम अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा करते हैं, लेकिन कई मिसाइलें आबादी वाले इलाकों में गिरने में सफल रही हैं। इस युद्ध की शुरुआत से अब तक इजरायल में कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई इजरायली हमलों का जवाब है, जिससे यह स्पष्ट है कि हिंसा का यह चक्र थमने वाला नहीं है।
ईरान, लेबनान और इजरायल के बीच छिड़ा यह त्रिकोणीय संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है। एक तरफ जहां ईरान में मौतों का आंकड़ा हजारों में पहुँच रहा है, वहीं लेबनान में लाखों लोग बेघर होकर सड़कों पर आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति की अपीलें अब तक बेअसर साबित हुई हैं। यदि युद्ध इसी गति से आगे बढ़ा, तो शरणार्थी संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता की ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसे संभालना दुनिया की बड़ी शक्तियों के लिए भी मुश्किल होगा।
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