Left Side Sleeping Benefits : रात में सोते समय लोग कई बार अपनी करवट और सोने की पॉजिशन बदलते रहते हैं। कोई दाईं करवट सोना पसंद करता है तो कोई बाईं ओर, जबकि कुछ लोग पेट के बल या अलग-अलग तरीके से सोते हैं। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट अक्सर बाईं करवट सोने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि यह स्थिति खासतौर पर एसिड रिफ्लक्स यानी पेट का एसिड ऊपर आने जैसी समस्या के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है।
नींद पर सिर्फ सोने की पॉजिशन का असर नहीं
अच्छी नींद के लिए केवल सोने की स्थिति ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि रात में सोने से पहले की आदतें और खान-पान भी भूमिका निभाते हैं। एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन फिजिशियन डॉक्टर कुणाल सूद ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नींद से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर ध्यान दिया है। उनके मुताबिक, देर रात खाना, पेट से जुड़ी परेशानियां और खान-पान की आदतें नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
बाईं करवट सोने से एसिड रिफ्लक्स में राहत
एसिड रिफ्लक्स की स्थिति तब होती है जब पेट का एसिड वापस खाने की नली यानी अन्नप्रणाली की ओर पहुंचने लगता है। इससे सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। डॉक्टर कुणाल सूद के मुताबिक, बाईं करवट सोने से पेट और अन्नप्रणाली के बीच मौजूद लोअर ओसोफेजियल स्फिंक्टर यानी एलईएस को पेट के एसिड के स्तर से ऊपर रखने में मदद मिल सकती है।
पेट की संरचना से जुड़ा है करवट का प्रभाव
बाईं ओर सोने की स्थिति में शरीर की बनावट के कारण पेट का एसिड ऊपर की ओर वापस आने की संभावना कुछ लोगों में कम हो सकती है। इससे रात के दौरान रिफ्लक्स के लक्षणों में राहत मिल सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। लगातार एसिड रिफ्लक्स की समस्या रहने पर केवल सोने की पॉजिशन बदलने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सोने से ठीक पहले भारी खाना पड़ सकता है भारी
सोने से ठीक पहले ज्यादा या भारी भोजन करना भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। भोजन करने के बाद शरीर पाचन प्रक्रिया में सक्रिय रहता है, जबकि रात के समय शरीर को आराम और शांत अवस्था की जरूरत होती है। ऐसे में देर रात भारी खाना खाने से सोने में परेशानी या रात में बार-बार नींद टूटने जैसी समस्या हो सकती है।
सोने से दो घंटे पहले भोजन करना बेहतर
डॉक्टर कुणाल सूद के मुताबिक, सोने से करीब दो घंटे पहले भारी भोजन करने से बचना चाहिए। सोने के बिल्कुल नजदीक खाना खाने से पाचन प्रक्रिया सक्रिय रहती है और शरीर को आराम की अवस्था में जाने में समय लग सकता है। इसके अलावा, देर रात भोजन करने से कुछ लोगों में पेट संबंधी परेशानी और एसिड रिफ्लक्स के लक्षण भी बढ़ सकते हैं।
हार्मोन और नींद के बीच भी संबंध
सोने से ठीक पहले भोजन करने का संबंध शरीर में भूख और मेटाबॉलिज्म से जुड़े हार्मोन की गतिविधि से भी बताया जाता है। डॉक्टर के अनुसार, घ्रेलिन और इंसुलिन जैसे हार्मोन की गतिविधि नींद से जुड़ी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। वहीं, मेलाटोनिन शरीर के नींद-जागने के चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए नियमित समय पर भोजन और सोने की आदत बेहतर नींद के लिए उपयोगी हो सकती है।
बेहतर नींद के लिए आदतों पर दें ध्यान
अच्छी नींद के लिए सोने की सही पॉजिशन के साथ-साथ समय पर भोजन करना, देर रात भारी खाना न खाना और पेट से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज न करना जरूरी है। बाईं करवट सोना कुछ लोगों को एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों में राहत दे सकता है, लेकिन लगातार परेशानी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। नींद की गुणवत्ता लंबे समय तक खराब रहने पर इसके पीछे के कारणों की जांच भी जरूरी हो सकती है।
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