अंबिकापुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष रामकिशुन सिंह की पद पर वैधानिक पात्रता को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है। ऋण खाता कालातीत होने के दावे पर कोर्ट ने राज्य शासन समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
अंबिकापुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष रामकिशुन सिंह की पद पर वैधानिक पात्रता को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है। ऋण खाता कालातीत होने के दावे पर कोर्ट ने राज्य शासन समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

Legal Challenge : जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर के अध्यक्ष रामकिशुन सिंह की पद पर वैधानिक पात्रता अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। उनके नाम से जुड़े एक ऋण खाते के लंबे समय से कालातीत बताए जाने को आधार बनाकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता विनय प्रभात गुप्ता ने दावा किया है कि बैंक के रिकॉर्ड में ऋण खाते पर बड़ी रकम बकाया है और इसके बावजूद रामकिशुन सिंह अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने राज्य शासन समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। हालांकि, हाई कोर्ट ने अभी अध्यक्ष की पात्रता पर कोई अंतिम निर्णय या टिप्पणी नहीं की है।


प्रेमनगर, सूरजपुर निवासी विनय प्रभात गुप्ता की ओर से दायर याचिका में रामकिशुन सिंह के नाम से दर्ज बैंक खाते का उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार मेसर्स बाबा टांगीनाथ स्टोन क्रेशर, गंगापुर मेन रोड, अंबिकापुर के नाम से नकद साख खाता क्रमांक 603005019761 दर्ज है। इस खाते के लिए वर्ष 2009 में 10 लाख रुपये की नकद साख सीमा स्वीकृत किए जाने की जानकारी याचिका में दी गई है।

याचिकाकर्ता ने बैंक के विभिन्न अभिलेखों का हवाला देते हुए दावा किया है कि संबंधित खाता वर्ष 2021 से लगातार कालातीत स्थिति में है। याचिका में प्रस्तुत दस्तावेजों के मुताबिक 28 जुलाई 2021 को खाते में कालातीत राशि 24,75,511 रुपये दर्ज थी।
इसके बाद एक नवंबर 2022 को यह राशि बढ़कर 28,63,912 रुपये और 22 मार्च 2023 को 29,91,135 रुपये होने का दावा किया गया है। वहीं 12 दिसंबर 2024 के रिकॉर्ड में बकाया राशि 34,73,902 रुपये दर्ज होने की बात याचिका में कही गई है।
याचिका में वर्ष 2026 की खाता रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। इसमें मूल बकाया 6,12,047 रुपये, अर्जित ब्याज 30,23,290 रुपये और पेनल्टी ब्याज 5,75,348 रुपये बताए जाने का उल्लेख है। याचिका के अनुसार इन सभी मदों को मिलाकर नेट क्लोजर अमाउंट 42,10,685 रुपये बताया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि सहकारी अधिनियम और बैंक के उपविधानों में कालातीत ऋणी अथवा डिफॉल्टर व्यक्ति के संचालक और अध्यक्ष पद पर पात्रता से जुड़े प्रावधान हैं। इन्हीं प्रावधानों के आधार पर उन्होंने रामकिशुन सिंह के अध्यक्ष पद पर बने रहने की वैधानिक पात्रता पर सवाल उठाया है।
याचिका के मुताबिक इस मामले को लेकर पहले सहकारिता विभाग और पंजीयक, सहकारी संस्थाओं के समक्ष शिकायत भी की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा।
मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ में हुई। हाई कोर्ट ने याचिका पर राज्य शासन समेत संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता आनंद दादरिया तथा प्रतिवादी क्रमांक 3 और 4 की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र श्रीवास्तव ने नोटिस की तामील स्वीकार की।
फिलहाल अदालत ने याचिका में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं की है और न ही रामकिशुन सिंह की अध्यक्ष पद पर पात्रता को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष दिया है। अब संबंधित पक्ष अपना जवाब हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। सेवा रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। इसके बाद ही इस विवाद में आगे की न्यायिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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