Love Marriage news: प्रेम विवाह अक्सर लोगों की निजी खुशी होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से सामने आए एक अनोखे मामले ने सभी को चौंका दिया है। यहां एक युवक की महाराष्ट्र की युवती से हुई लव मैरिज अब सामाजिक आफत बन गई है। शादी के तीन साल बाद जब यह मामला समाज के सामने आया, तो अब 45 गांवों के करीब 500 लोग दूल्हे से ‘मुर्गा पार्टी’ की मांग पर अड़ गए हैं और उसके घर के बाहर डेरा जमाए बैठे हैं।

कौन हैं प्रभाष और अलीसा?
यह मामला कांकेर जिले के पखांजुर क्षेत्र के पीवी-101 विष्णुपुर गांव का है। यहां रहने वाले 26 वर्षीय प्रभाष विश्वास ने 25 वर्षीय अलीसा पोटामी, जो कि महाराष्ट्र के भूमकाम गांव की निवासी है, से साल 2022 में कोर्ट मैरिज की थी। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने यह शादी परिवार से छुपाकर की थी।

अलीसा की प्रभाष से मुलाकात खेती-बाड़ी के काम के दौरान हुई थी, जब वह मजदूरी के लिए छत्तीसगढ़ आई थी। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और फिर दोनों ने शपथ पत्र के जरिए शादी कर ली।
शादी छुपाई, परिजनों ने दर्ज कराई गुमशुदगी
शादी के बाद अलीसा पढ़ाई के लिए अहेरी चली गई, जिससे शादी की बात तीन साल तक छिपी रही। हाल ही में जब अलीसा अपने पति प्रभाष के घर रहने आई, तब उसके महाराष्ट्र स्थित परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस जब युवती को ढूंढते हुए प्रभाष के घर पहुंची, तो अलीसा ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से विवाह किया है। इसके बाद मामला बंद कर दिया गया।
अब क्यों हो रही है ‘मुर्गा पार्टी’ की मांग?
अलीसा एक आदिवासी समाज से ताल्लुक रखती हैं, जहां की परंपरा है कि यदि कोई लड़की दूसरे समाज में विवाह करती है तो दूल्हे को समाज को ‘बकरा-मुर्गा-भात’ यानी विशेष भोज देना होता है। यह एक सांकेतिक दंड है, जिसे समाज की मान्यता पाने के लिए निभाना जरूरी होता है।प्रभाष ने अब तक इस परंपरा का पालन नहीं किया, जिस कारण भूमकाम समेत 45 गांवों के 500 लोग विष्णुपुर गांव पहुंच गए हैं और वहां डेरा डाल दिया है। समाज के लोग तब तक वहां से हटने को तैयार नहीं हैं, जब तक पूरी परंपरा का पालन नहीं हो जाता।
प्रशासन की निगरानी, मामला बढ़ने की आशंका
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की नजर इस मामले पर बनी हुई है। हालांकि अभी स्थिति शांतिपूर्ण है, लेकिन भीड़ की मौजूदगी से तनाव का माहौल है। समाज के वरिष्ठजन इस विवाद को आपसी समझौते से सुलझाने की कोशिश में लगे हैं।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि प्रेम विवाह सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि कई बार समाज और परंपराओं की परीक्षा भी बन जाता है। जहां एक ओर नए दौर की सोच सामने है, वहीं दूसरी ओर परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। अब देखना होगा कि प्रभाष और अलीसा को सामाजिक स्वीकृति कब और कैसे मिलती है।










