Mahadev App Case
Mahadev App Case: महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट के खिलाफ एक और बड़ी सफलता हासिल की है। बुधवार को ED ने घोषणा की कि उसने इस मामले के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और उनके करीबियों से जुड़ी लगभग 92 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है। इस कार्रवाई ने सट्टेबाजी के जरिए काली कमाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कमर तोड़ दी है।
ED के आधिकारिक बयान के अनुसार, अटैच की गई कुल संपत्ति में 74.28 करोड़ रुपये के बैंक डिपॉजिट शामिल हैं। ये खाते ‘परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC’ और ‘एक्सिम जनरल ट्रेडिंग’ जैसी फर्जी कंपनियों के नाम पर संचालित किए जा रहे थे। जांच में इन कंपनियों का सीधा संबंध मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर, विकास छपरिया और अनिल अग्रवाल से पाया गया है। इसके अलावा, 17.5 करोड़ रुपये की अन्य संपत्तियां गगन गुप्ता की हैं, जो दुबई में हवाला ऑपरेटर के रूप में काम करता है और Skyexchange.com से जुड़ा हुआ है।
महादेव ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं, लेकिन वर्तमान में वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में बैठकर अपना साम्राज्य चला रहे हैं। ED ने बताया कि इन आरोपियों को भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। भारतीय एजेंसियां लगातार यूएई सरकार के संपर्क में हैं ताकि इन भगोड़ों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जा सके।
जांच एजेंसी ने खुलासा किया है कि महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) केवल एक सट्टेबाजी ऐप नहीं था, बल्कि यह धोखाधड़ी का एक सुनियोजित जरिया था। ऐप में मौजूद कई गेम्स ‘रिग्ड’ (Rigged) थे, यानी सॉफ्टवेयर के जरिए हार-जीत का फैसला पहले ही संचालक तय कर लेते थे। ग्राहकों को लालच देकर फंसाया जाता था और अंततः उनकी हार निश्चित होती थी। इस तरह लूटी गई करोड़ों की रकम को अवैध रास्तों से ठिकाने लगाया जाता था।
ED की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कैसे सट्टेबाजी की काली कमाई को सफेद किया जा रहा था। इस सिंडिकेट ने हवाला नेटवर्क और क्रिप्टो करेंसी के जरिए पैसा विदेश भेजा। बाद में इसी पैसे को ‘फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट’ (FPI) के जरिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया। अधिकारियों ने एक ‘कैशबैक रैकेट’ का भी पर्दाफाश किया है, जिसमें लिस्टेड कंपनियों में निवेश के बदले प्रमोटरों से 30 से 40 प्रतिशत तक की राशि नकद वापस ली जाती थी।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 5 चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ED अब तक कुल 2,600 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है। जांच के दायरे में छत्तीसगढ़ के कई रसूखदार नेता और वरिष्ठ नौकरशाह भी शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि महादेव ऐप एक ‘अंब्रेला सिंडिकेट’ की तरह काम कर रहा था, और आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।
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