Mahakal Temple Aarti Fee
Mahakal Temple Aarti Fee: विश्व प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में हाल ही में लिए गए एक निर्णय ने बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा ‘संध्या’ और ‘शयन’ आरती के लिए प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित करने के फैसले का चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। श्रद्धालु और हिंदू संगठन इस कदम को आस्था पर प्रहार मान रहे हैं, वहीं मंदिर प्रशासन इसे व्यवस्थाओं में सुधार और पारदर्शिता लाने का एक माध्यम बता रहा है। यह विवाद अब धार्मिक गलियारों से निकलकर राजनीतिक अखाड़े तक पहुँच गया है।
मंदिर समिति ने बाबा महाकाल की संध्या आरती और शयन आरती में सम्मिलित होने के लिए ₹250 प्रति श्रद्धालु का शुल्क लागू किया है। जैसे ही यह खबर फैली, उज्जैन सहित देशभर के भक्तों में नाराजगी देखी गई। विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि भगवान के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए टिकट की व्यवस्था करना अनुचित है। कई हिंदू संगठनों ने इस शुल्क की तुलना मुगलकालीन ‘जजिया कर’ से कर दी है। भक्तों का कहना है कि क्या अब गरीब आदमी को अपने आराध्य की आरती देखने के लिए भी जेब ढीली करनी होगी?
विरोध के बीच मंदिर प्रबंध समिति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यह कदम दर्शन व्यवस्था को अधिक सुलभ और व्यवस्थित बनाने के लिए उठाया गया है। समिति के अनुसार, डिजिटलाइजेशन के इस दौर में अब देश-विदेश के श्रद्धालु घर बैठे आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी बुकिंग सुनिश्चित कर सकेंगे। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर सभी को समान अवसर मिलेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी।
नई व्यवस्था के तहत, संध्या और शयन आरती की बुकिंग अब केवल ऑनलाइन माध्यम से ही संभव होगी। श्रद्धालु मंदिर की अधिकृत वेबसाइट https://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/ पर जाकर अपना स्लॉट बुक कर सकते हैं।
संध्या आरती: इसके लिए बुकिंग प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे से शुरू होगी।
शयन आरती: इसकी बुकिंग प्रक्रिया प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से प्रारंभ की जाएगी। दोनों ही आरतियों के लिए ₹250 का शुल्क वही रखा गया है जो वर्तमान में ‘शीघ्र दर्शन’ के लिए लिया जाता है।
इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर सीधा हमला बोलते हुए इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया है। पटवारी ने कहा कि भाजपा का असली चेहरा अब जनता के सामने है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही यह शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे गरीब श्रद्धालुओं के लिए दर्शन कठिन हो जाएंगे। कांग्रेस ने इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है और इसे धर्म का बाजारीकरण बताया है।
विवाद बढ़ता देख मोहन यादव सरकार के मंत्रियों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। सरकार में शामिल मंत्रियों का कहना है कि वे इस संवेदनशील मामले पर मंदिर प्रबंधन और समिति से चर्चा करेंगे। जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए शुल्क को हटाने या इसमें संशोधन करने की मांग पर विचार किया जा सकता है। सरकार के इस नरम रुख से संकेत मिल रहे हैं कि भारी दबाव के चलते शायद इस फैसले को बदला जा सकता है।
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