The Diary of Manipur: प्रयागराज के महाकुंभ मेले में अपनी मासूमियत और सादगी से करोड़ों दिलों को जीतने वाली ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक साल के लंबे अंतराल के बाद उन्होंने संगम तट पर आयोजित माघ मेले में वापसी की है, लेकिन इस बार वह एक साधारण श्रद्धालु या रील मेकर के रूप में नहीं, बल्कि एक उभरती हुई बॉलीवुड अभिनेत्री के तौर पर लौटी हैं। कभी मेले में माला बेचकर अपना गुजर-बसर करने वाली मोनालिसा अब बड़े पर्दे पर अपना जादू बिखेरने के लिए तैयार हैं। वह अभिनेता राजकुमार राव के भाई अमित राव के साथ फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ के जरिए सिनेमा जगत में कदम रख रही हैं। हाल ही में इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है।

फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’: टीजर में दिखा मोनालिसा का दमदार अंदाज
सनोज मिश्रा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ का टीजर दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। टीजर की शुरुआत ही मोनालिसा के क्लोज-अप शॉट से होती है, जिसमें उनकी कजरारी आंखें और सादगीपूर्ण एक्सप्रेशंस दर्शकों को बांध लेते हैं। फिल्म की कहानी मणिपुर के ऐतिहासिक घटनाक्रमों और वहां की जटिल राजनीति के इर्द-गिर्द बुनी गई है। बिना किसी औपचारिक एक्टिंग ट्रेनिंग के भी मोनालिसा ने जिस तरह से डांस मूव्स और भावुक दृश्यों को निभाया है, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है। उनके साथ अमित राव भी एक मंझे हुए कलाकार की तरह स्क्रीन पर नजर आ रहे हैं, जिससे फिल्म के प्रति उत्सुकता और बढ़ गई है।
इटावा से नेपाल तक: चार चरणों में पूरी हुई फिल्म की शूटिंग
निर्देशक सनोज मिश्रा, जो ‘गांधीगिरी’ और ‘शशांक’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, ने मोनालिसा के सफर के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि इस फिल्म का निर्माण किसी चुनौती से कम नहीं था। फिल्म की शूटिंग चार अलग-अलग चरणों में पूरी की गई। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के इटावा से हुई, जिसके बाद टीम मणिपुर की वास्तविक लोकेशंस पर पहुंची। फिल्म का कुछ हिस्सा नेपाल की खूबसूरत वादियों में और एक बड़ा हिस्सा देहरादून में फिल्माया गया है। सनोज मिश्रा ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार महाकुंभ में मोनालिसा को रील और सेल्फी के लिए लोगों से घिरे देखा, तो उन्हें काफी बुरा लगा। इसी के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश के महेश्वर के एक साधारण बंजारा परिवार से आने वाली इस लड़की को मुख्य भूमिका देने का साहसी फैसला किया।
चुनौतियों भरा सफर: डबिंग का सहारा और कड़ी मेहनत
मोनालिसा के लिए बॉलीवुड की राह आसान नहीं थी। जब उन्हें फिल्म ऑफर हुई, तब उन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना भी नहीं आता था। निर्देशक ने उन्हें बुनियादी शिक्षा और अभिनय की बारीकियां सीखने के लिए पहले इंदौर और फिर मुंबई भेजा। सनोज मिश्रा के अनुसार, “मोनालिसा बेहद मेहनती हैं। शुरुआत में वह सिर्फ अपना नाम लिखना जानती थीं, लेकिन उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से एक्टिंग सीखी।” हालांकि, भाषा और उच्चारण (Diction) की समस्या के कारण फिल्म में मोनालिसा की अपनी आवाज नहीं होगी; उनकी भूमिका के लिए डबिंग का सहारा लिया गया है। फिर भी, उनकी आंखों की मासूमियत और स्क्रीन प्रेजेंस को उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
गंगा का आशीर्वाद और भविष्य की राह
फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद पूरी स्टारकास्ट और क्रू ने मां गंगा का आशीर्वाद लिया। मोनालिसा के लिए यह फिल्म महज एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक नया जीवन है। वायरल होने से लेकर मुख्यधारा के सिनेमा तक का उनका यह सफर उन सभी के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों या गरीब तबकों से आकर बड़े सपने देखते हैं। अब दर्शकों को इंतजार है फिल्म की रिलीज का, ताकि वे देख सकें कि महाकुंभ की यह बेटी बड़े पर्दे पर क्या करिश्मा दिखाती है।

















