Maharashtra politics 2026
Maharashtra politics 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक ताजा बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। राउत ने दावा किया है कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार का मन अब अपनी वर्तमान गठबंधन सरकार में नहीं लग रहा है और उनका “दिल” आज भी अपने परिवार और शरद पवार के साथ है। राउत के इस बयान ने उन कयासों को बल दे दिया है कि आगामी दिनों में अजित पवार पाला बदलकर महाविकास आघाडी (MVA) में शामिल हो सकते हैं। महाराष्ट्र की सत्ता के समीकरणों को देखते हुए यह दावा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संजय राउत ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में एक बेहद चौंकाने वाला तर्क पेश किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों का वास्तव में विलय हो चुका है। अपने दावे को पुख्ता करने के लिए उन्होंने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों का उदाहरण दिया। राउत के अनुसार, राज्य में होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में शरद पवार और अजित पवार के समर्थक गुट ‘घड़ी’ के चुनाव चिन्ह पर एक साथ मैदान में उतर रहे हैं। उन्होंने इसे महज चुनावी तालमेल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित विलय बताया जो पर्दे के पीछे से संचालित हो रहा है।
संजय राउत ने अजित पवार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि वे फिलहाल महायुति सरकार (भाजपा-शिंदे गुट) का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन उनका भावनात्मक जुड़ाव अभी भी शरद पवार के नेतृत्व वाली महाविकास आघाडी से बना हुआ है। राउत ने जोर देकर कहा, “अजित पवार लंबे समय तक एक साथ दो नावों पर सवार नहीं रह सकते। अंततः वे अपने परिवार की ओर ही लौटेंगे और शरद पवार के मार्गदर्शन में एमवीए के झंडे तले राजनीति करेंगे।” गौरतलब है कि जुलाई 2024 में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से बगावत कर सरकार का दामन थामा था, जिसके बाद पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी।
संजय राउत ने केवल पवार परिवार पर ही टिप्पणी नहीं की, बल्कि उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के बीच बढ़ती कड़वाहट का भी जिक्र किया। राउत ने दावा किया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद को लेकर मुख्यमंत्री शिंदे बेहद नाराज हैं। राउत के अनुसार, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व मेयर पद को लेकर किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है और वह इस पद पर अपना नियंत्रण चाहती है। इस खींचतान के कारण महायुति के भीतर भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है, जो राज्य सरकार की स्थिरता के लिए आने वाले समय में चुनौती बन सकती है।
महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति के संकेत स्थानीय निकाय चुनावों से मिलने शुरू हो गए हैं। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में राकांपा के विभिन्न गुटों ने पहले ही हाथ मिला लिया है। अब 5 फरवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों के तीसरे चरण के लिए भी इन्होंने गठबंधन की औपचारिक घोषणा कर दी है। ये सभी उम्मीदवार अजित पवार के नेतृत्व वाली पार्टी के मूल चुनाव चिन्ह ‘घड़ी’ पर चुनाव लड़ेंगे। यह गठबंधन इस ओर इशारा करता है कि निचले स्तर के कार्यकर्ता और नेता अभी भी एकजुट हैं, भले ही शीर्ष स्तर पर दूरियां नजर आ रही हों। महाराष्ट्र की राजनीति का यह नया अध्याय आने वाले हफ्तों में और भी रोचक मोड़ ले सकता है।
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