Mahasamund News : छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ (DDUBKMKY) महासमुंद जिले में प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी गड़बड़ी का शिकार होती नजर आ रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन गरीब मजदूरों को आर्थिक संबल प्रदान करना है जिनके पास खेती के लिए अपनी भूमि नहीं है। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में योजना की राशि पहुंचने के बजाय, यह पैसा दूसरे अनजान खातों में धड़ल्ले से ट्रांसफर हो रहा है। इसके चलते गरीब लाभार्थी बैंक की चौखट और जनपद कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
भ्रष्टाचार या तकनीकी लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण महासमुंद जिले के मुस्की गांव से सामने आया है। यहां की निवासी सुशीला निषाद (पति होरीलाल निषाद) ने योजना के तहत अपना विधिवत पंजीयन कराया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, तुमगांव का खाता नंबर भी प्रशासन को उपलब्ध कराया था। सुशीला का पंजीयन क्रमांक 20220628002332 है और वे पूरी तरह से पात्र हितग्राही हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2024-25 के तहत उनके नाम पर 10 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन जारी की गई। लेकिन जब सुशीला बैंक पहुंचीं, तो पता चला कि उनके खाते में फूटी कौड़ी भी नहीं आई है। जांच करने पर पता चला कि उनके हक का पैसा किसी अन्य ‘सुशीला चन्द्राकर’ के पंजाब नेशनल बैंक खाते में भेज दिया गया है।
जब पीड़ित महिला ने इस मामले की गहराई से जांच-पड़ताल की, तो प्रशासन की एक बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई। यह पता चला कि सुशीला चन्द्राकर नामक महिला के खाते में केवल एक नहीं, बल्कि कुल 18 हितग्राहियों की सहायता राशि ट्रांसफर हो रही है। यह तथ्य सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। सुशीला निषाद ने बताया कि उन्होंने तीन साल पहले इस योजना में अपना पंजीकरण कराया था, लेकिन आज तक उन्हें एक भी किस्त नसीब नहीं हुई है। उन्होंने इस गंभीर मामले की लिखित शिकायत जनपद अधिकारियों से की है, परंतु लंबे समय बाद भी समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत महासमुंद जिले में कुल 35,226 पात्र हितग्राही नामांकित हैं। इनमें से अकेले महासमुंद जनपद में सबसे ज्यादा 9,528 हितग्राही आते हैं। एक ही बैंक खाते में 18 लोगों का पैसा जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह मामला केवल तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि किसी बड़े घोटाले या गंभीर प्रशासनिक चूक का हिस्सा हो सकता है। पूर्व जनपद सदस्य योगेश्वर चन्द्राकर ने इस विषय को उठाते हुए कहा है कि यदि गहनता से जांच की जाए, तो जिले में ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए और गरीबों का पैसा उन्हें वापस दिलाया जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने इस पर संज्ञान लिया है। कलेक्टर ने बताया कि उन्हें गड़बड़ी की शिकायत प्राप्त हुई है और उन्होंने भू-अभिलेख शाखा के प्रभारी को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि डेटा प्रविष्टि में हुई किसी भी तरह की त्रुटि या जानबूझकर की गई हेराफेरी की जांच की जाएगी। कलेक्टर ने आश्वस्त किया है कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत या लापरवाही पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब देखना यह होगा कि सुशीला निषाद जैसे गरीब मजदूरों को उनका हक कब तक मिल पाता है।
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