Gaya river tragedy: बिहार के गया जिले में खिजरसराय थाना क्षेत्र के अंतर्गत केनी पुल के पास गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। सोशल मीडिया पर रील बनाने के चक्कर में 9 स्कूली लड़के नदी में डूब गए, जिनमें से 5 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 2 लड़कों की हालत गंभीर बनी हुई है। यह हादसा तब हुआ जब ये सभी लड़के स्कूल से लौटते वक्त नदी किनारे वीडियो बनाने गए थे।

रील बनाने के दौरान गहरे पानी में फंस गए छात्र
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सभी लड़के नदी किनारे मस्ती कर रहे थे और सोशल मीडिया पर अपलोड करने के लिए रील बना रहे थे। इसी दौरान उनमें से कुछ गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। शोर सुनकर स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्य में जुट गए।

बचाव के बाद 7 अस्पताल में भर्ती, 5 की मौत
स्थानीय लोगों की मदद से सभी लड़कों को किसी तरह पानी से बाहर निकाला गया और तत्काल बेलागंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां से दो गंभीर रूप से घायल छात्रों को अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल (ANMMCH) रेफर किया गया।
बेलागंज में भर्ती सात लड़कों में से 5 की मौत हो गई, जबकि दो का इलाज जारी है।
स्कूल से लौटते वक्त बना रहे थे वीडियो
सूत्रों के मुताबिक, मृतक और घायल छात्र 11वीं और 12वीं कक्षा के थे और स्कूल से लौटते समय वीडियो बनाने के लिए नदी किनारे रुक गए थे। अचानक हुए इस हादसे से गांव में मातम छा गया है और परिजन सदमे में हैं।
पहचान में आए 6 छात्र, प्रशासन जुटा जांच में
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। नीमचक बथानी अनुमंडल के एसडीएम केशव आनंद ने बताया कि फिलहाल 6 लड़कों की पहचान हो चुकी है —तौसीफ, जासिफ, साहिल, जैम, सुफियान और साजिद।घटना केनी घाट के पास हुई थी। अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और घटना की विस्तृत जांच जारी है।
रील बनाने की बढ़ती होड़ बनी जानलेवा
यह हादसा एक बार फिर सोशल मीडिया पर रील बनाने की बढ़ती लत और लापरवाही को उजागर करता है। जानकारों का कहना है कि युवाओं में ऑनलाइन प्रसिद्धि की होड़ इतनी बढ़ गई है कि वे अपनी जान की कीमत पर भी जोखिम उठाने को तैयार हैं। गया की यह दुखद घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया की दुनिया में लाइक और फॉलोअर्स के पीछे भागती नई पीढ़ी किस कदर खतरे उठा रही है। इस घटना के बाद ज़रूरत है कि अभिभावक, शिक्षक और प्रशासन मिलकर छात्रों को सावधानी और जागरूकता का पाठ पढ़ाएं, ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
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