Pakistan Army Attack: अफगान सीमा के पास पाकिस्तानी सेना पर बड़ा आतंकी हमला, 13 जवान शहीद , TTP ने ली जिम्मेदारी

Pakistan Army Attack:  पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक बार फिर आतंक का कहर बरपा। अफगान सीमा से सटे इलाके में बुधवार को पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के काफिले पर हुए भीषण हमले में 11 पैरामिलिट्री सैनिकों और 2 अधिकारियों की मौत हो गई। इस घातक हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित आतंकी संगठन तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ली है।

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हमला ऐसे दिया गया अंजाम

जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों का काफिला जब एक निर्धारित मार्ग से गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे छिपाए गए बम में जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट के तुरंत बाद आतंकियों ने काफिले पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। यह हमला पहले से ही सोची-समझी साजिश लग रहा है, जिसमें सुरक्षाबलों को खास निशाना बनाया गया।

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टीटीपी कौन है?

तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), जिसे आमतौर पर पाकिस्तानी तालिबान के नाम से जाना जाता है, एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन है। यह संगठन पाकिस्तानी संविधान, सरकार और सेना के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए है। टीटीपी का मुख्य उद्देश्य शरीयत आधारित शासन स्थापित करना और पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था को उखाड़ फेंकना है।

पिछले कुछ महीनों में टीटीपी ने पाकिस्तान में अपने हमलों की संख्या में तेज़ी लाई है। खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और उत्तरी वज़ीरिस्तान जैसे इलाकों में सेना पर हमले आम हो गए हैं।

अफगानिस्तान से मिल रहा है समर्थन?

पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि टीटीपी के आतंकी अफगानिस्तान की सीमा पार सुरक्षित पनाहगाहों में प्रशिक्षण लेते हैं और वहीं से हमलों की योजना बनाते हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन चरमपंथियों पर लगाम लगाने में असफल रही है  या जानबूझकर इन्हें नजरअंदाज कर रही है।हालांकि, अफगान तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान की घरेलू असुरक्षा को अपनी असफलता बताया है।

क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा

यह हमला सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है। पाकिस्तान की सेना पहले से ही कई मोर्चों पर लड़ रही है, और इस तरह के लगातार हमले न सिर्फ मनोबल तोड़ते हैं, बल्कि आम नागरिकों में डर का माहौल भी पैदा करते हैं।

खैबर पख्तूनख्वा में हुआ यह हमला दर्शाता है कि पाकिस्तान की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अब और अधिक जटिल होती जा रही है। टीटीपी जैसे संगठनों को सिर्फ सैन्य बल से नहीं, बल्कि कूटनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर भी चुनौती दी जानी चाहिए।

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