Malaria Outbreak : छत्तीसगढ़ में मलेरिया के मामले एक बार फिर चिंता का विषय बन गए हैं। पिछले 20 दिनों में प्रदेश के 10 जिलों में 1265 मलेरिया पॉजिटिव केस सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मरीज बस्तर संभाग से मिले हैं। यह जानकारी राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 12वें चरण के तहत सामने आई है।
लगभग 98,600 लोगों की जांच, पॉजिटिव मरीजों को तत्काल दवा
अभियान के तहत 20 जून से लेकर अब तक स्वास्थ्यकर्मियों ने 19,402 घरों का दौरा किया और 98,594 लोगों की ब्लड जांच की। इन परीक्षणों में 1265 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए, जिन्हें मौके पर ही दवा की पहली खुराक दे दी गई। सभी मरीजों को एक इलाज कार्ड भी दिया गया है, जिससे उनका फॉलोअप और निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
2015 की तुलना में बड़ी सफलता, राज्य का API भी घटा
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 2015 के मुकाबले बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में 71% की गिरावट आई है। साथ ही राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) भी 27.40 से घटकर 7.11 तक आ गया है। ये आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि सरकारी प्रयासों का असर जमीन पर दिख रहा है।
मलेरिया से जंग अब इलाज नहीं, रणनीति और जनभागीदारी की लड़ाई
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि “मलेरिया से जंग अब सिर्फ दवा तक सीमित नहीं है, यह एक रणनीतिक और सामाजिक लड़ाई बन चुकी है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य 2027 तक शून्य मलेरिया और 2030 तक पूर्ण मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ बनाना है।
स्वास्थ्य अभियान बना जनआंदोलन
मंत्री जायसवाल ने यह भी कहा कि मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब सिर्फ स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी इस सफलता में अहम रही है।
मच्छरदानी, जलजमाव से बचाव, सफाई पर जोर
अभियान में इलाज के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। लोगों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलजमाव से बचाव, और स्वच्छता बनाए रखने जैसे व्यवहारिक उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
तीन साल से एक भी मलेरिया मरीज नहीं, लेकिन आंकड़ों में भ्रम
दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि राजधानी रायपुर में पिछले तीन साल से एक भी मलेरिया केस दर्ज नहीं हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों की जटिलता और तकनीकी शर्तों के कारण यह तस्वीर सही नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति रायपुर में संक्रमित पाया गया लेकिन उसकी यात्रा की हिस्ट्री है, तो उसे रायपुर का केस नहीं माना जाता।
अभी लंबा सफर बाकी, लेकिन रणनीति और सहभागिता से उम्मीद
छत्तीसगढ़ ने मलेरिया नियंत्रण में अब तक बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन संख्या में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि अभी सतर्कता की आवश्यकता बनी हुई है। सरकार की रणनीति, स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत और जनभागीदारी से यह लक्ष्य अवश्य हासिल हो सकता है कि 2030 तक राज्य को मलेरिया मुक्त घोषित किया जा सके।
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