Mali Burkina Faso US ban
Mali Burkina Faso US ban: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त विदेश नीति और यात्रा प्रतिबंधों के खिलाफ पश्चिम अफ्रीकी देशों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार देर रात एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाले घटनाक्रम में माली (Mali) और बुर्किना फासो (Burkina Faso) ने घोषणा की कि वे अब अमेरिकी नागरिकों को अपने देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देंगे। यह निर्णय डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इन देशों के नागरिकों पर अमेरिका आने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में लिया गया है। गरीब माने जाने वाले इन देशों के इस साहसिक कदम ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है और वाशिंगटन के साथ उनके संबंधों में कड़वाहट को चरम पर पहुंचा दिया है।
माली के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई ‘समानता के सिद्धांत’ (Principle of Reciprocity) पर आधारित है। मंत्रालय ने कहा कि चूंकि अमेरिका ने माली के नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं, इसलिए माली सरकार भी अमेरिकी यात्रियों पर वही शर्तें और पाबंदियां लागू करेगी। अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय के अनुसार, यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। बुर्किना फासो के विदेश मंत्री करमोको जीन-मैरी ट्राओरे ने भी इसी तरह के एक हस्ताक्षरित बयान में पुष्टि की कि उनके देश के दरवाजे अब अमेरिकियों के लिए बंद रहेंगे।
विवाद की जड़ 16 दिसंबर को लिए गए डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले में है, जिसमें उन्होंने अमेरिका के मौजूदा यात्रा प्रतिबंधों (Travel Ban) का विस्तार किया था। ट्रंप ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 20 और देशों को इस प्रतिबंधित सूची में शामिल किया, जिनमें माली, बुर्किना फासो और नाइजर प्रमुख थे। व्हाइट हाउस का तर्क है कि इन देशों में सशस्त्र समूहों और आतंकवादी संगठनों की सक्रियता तेजी से बढ़ी है, जिससे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ट्रंप के इस फैसले ने पश्चिम अफ्रीकी देशों की सैन्य सरकारों को नाराज कर दिया है।
माली और बुर्किना फासो में वर्तमान में सैन्य शासकों (जंटा) की सरकारें हैं। इन सरकारों ने हाल के वर्षों में नागरिक सरकारों का तख्तापलट कर सत्ता हासिल की है। इन सैन्य शासकों ने न केवल अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, बल्कि उन्होंने क्षेत्रीय समूह ‘इकोनॉमिक कम्युनिटी ऑफ वेस्ट अफ्रीकन स्टेट्स’ (ECOWAS) से अलग होकर अपना एक नया संघ भी बना लिया है। पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका के साथ इनके रिश्ते पहले से ही ठंडे थे, लेकिन ताजा प्रतिबंधों ने कूटनीतिक रास्तों को लगभग बंद कर दिया है।
माली और बुर्किना फासो का यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ये दोनों ही देश दुनिया के सबसे गरीब देशों की श्रेणी में आते हैं। यहाँ की प्रति व्यक्ति आय 1200 डॉलर (लगभग 1 लाख रुपये) वार्षिक से भी कम है। ये देश लंबे समय से सशस्त्र विद्रोही समूहों और कट्टरपंथी हमलों से जूझ रहे हैं। सैन्य शासकों ने सत्ता संभालते समय इन समूहों को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन असुरक्षा का माहौल अब भी बरकरार है। अमेरिका ने इसी अस्थिरता को आधार बनाकर प्रतिबंध लगाए थे, जिसका इन देशों ने कूटनीतिक पलटवार किया है।
अफ्रीकी देशों के इस जवाबी प्रतिबंध से क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव और कम होने की आशंका है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इन देशों के बीच सहयोग खत्म होने से सशस्त्र समूहों को फैलने का अधिक मौका मिल सकता है। जहाँ एक ओर ट्रंप प्रशासन अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर अड़ा है, वहीं पश्चिम अफ्रीकी देशों का यह रवैया दिखाता है कि वे अब पश्चिमी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में नाइजर जैसे अन्य पड़ोसी देश भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं।
Read More: Isiah Whitlock Jr. Death: ‘द वायर’ के दिग्गज अभिनेता Isiah Whitlock Jr. का 71 साल की उम्र में निधन
Aaj Ka Rashifal (19 April 2026) : आज 19 अप्रैल की सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक…
SRH vs CSK : IPL 2026 का 27वां मैच क्रिकेट इतिहास के सबसे सांस रोक…
Giant hunting spider : प्रकृति के रहस्यों की खोज में जुटे दक्षिण अमेरिकी शोधकर्ताओं ने…
SDM Car Accident : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बड़ी दुर्घटना की खबर सामने…
Dinesh Mahant Thakordas : कहते हैं कि उम्र केवल एक संख्या होती है, और इस…
UP Home Guard Recruitment : उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं…
This website uses cookies.