Mallikarjun Kharge : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शायद अब सक्रिय राजनीति को अलविदा कहने और संन्यास लेने का मन बना रहे हैं। बीते दिन उनके द्वारा दिए गए एक भावुक बयान से देश के राजनीतिक हलकों में इसी बात के संकेत और कयास मिलने शुरू हो गए हैं। दरअसल, मल्लिकार्जुन खड़गे को कर्नाटक से उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए एक बार फिर निर्विरोध सांसद चुन लिया गया है।

बेंगलुरु में निर्वाचन अधिकारी से अपनी जीत का आधिकारिक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के तुरंत बाद उन्होंने मीडिया कर्मियों से विस्तृत बातचीत की। इस दौरान उन्होंने खुद को राज्यसभा के लिए पुन: निर्वाचित करने के लिए कांग्रेस के सभी विधायकों और सांसदों का दिल से आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी के प्रति भी अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और अपनी लंबी राजनीतिक पारी के भविष्य को लेकर एक ऐसा बयान दिया जिसने सबको चौंका दिया है।

खड़गे ने सोनिया गांधी और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति व्यक्त किया आभार
संसद के उच्च सदन के लिए चुने जाने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, “यह मेरे संपूर्ण राजनीतिक जीवन का 13वां चुनाव है। कांग्रेस पार्टी ने मुझ जैसे जमीनी कार्यकर्ता पर हमेशा भरोसा जताया और मुझे दशकों तक जनता की निस्वार्थ सेवा करने का अनमोल अवसर दिया है। इस निरंतर सहयोग के लिए मैं विशेष रूप से सोनिया गांधी जी का सदैव आभारी रहूंगा।
मुझे अपनी विचारधारा, अपनी पार्टी और अपने लोगों पर बहुत गर्व है।” उन्होंने आगे कहा कि मैं उन सभी समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं को भी बधाई और धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने हर मोड़ पर मेरा समर्थन किया, विशेष रूप से मेरे लंबे विधायक कार्यकाल और संसदीय जीवन में मेरा कंधा से कंधा मिलाकर सहयोग किया। उन्होंने कर्नाटक की जनता, पार्टी के सभी सदस्यों और मीडिया जगत का भी आभार माना, जिनके अटूट साथ की बदौलत वे देश में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले जन प्रतिनिधियों में से एक बन सके हैं।
अनुभवी नेता खड़गे दूसरी बार पहुंचे राज्यसभा
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक की सियासत से आने वाले 83 वर्षीय अनुभवी और कद्दावर दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अपने करियर में दूसरी बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। खड़गे वर्तमान समय में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष (विपक्ष के नेता) की दोहरी और अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
वे अक्टूबर 2022 से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अध्यक्ष पद पर आसीन हैं, जबकि फरवरी 2021 से वे राज्यसभा में विपक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे पहले, साल 2009 और 2014 के आम चुनावों में वे कर्नाटक की गुलबर्गा संसदीय सीट से भारी बहुमत के साथ लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं। खड़गे के नाम संसदीय लोकतंत्र में एक बेहद दुर्लभ और अजेय रिकॉर्ड भी दर्ज है, जिसके तहत वे साल 1972 से लेकर 2009 तक लगातार 9 बार कर्नाटक विधानसभा के सदस्य (विधायक) निर्वाचित हुए और कभी चुनाव नहीं हारे।
मनमोहन सिंह सरकार में रहे कैबिनेट मंत्री
अपने लंबे और बेदाग प्रशासनिक अनुभव के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे देश के नीति निर्धारण में अहम भूमिका निभा चुके हैं। वे केंद्र की तत्कालीन डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री, देश के रेल मंत्री तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री जैसे भारी-भरकम विभागों के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। खड़गे का परिवार भी आज राजनीति में पूरी तरह सक्रिय है; उनके बेटे प्रियांक खड़गे वर्तमान में कर्नाटक की सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि उनके दामाद राधाकृष्ण उनकी पारंपरिक लोकसभा सीट गुलबर्गा से मौजूदा सांसद हैं। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो मल्लिकार्जुन खड़गे बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और भगवान बुद्ध के सिद्धांतों में उनकी गहरी आस्था है। वे गुलबर्गा में एक भव्य ‘बुद्ध विहार’ का निर्माण करा रही संस्था ‘सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट’ के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं, जिसके जरिए वे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहते हैं।











