Mamata Banerjee
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग पर बेहद तीखा हमला बोला है। दक्षिण 24 परगना जिले के सागर आइलैंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया के लिए भाजपा के आईटी सेल द्वारा विकसित मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तकनीक के जरिए वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष होने के बजाय एक विशेष राजनीतिक दल के इशारे पर काम कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर राज्य में अराजकता फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जीवित और पात्र मतदाताओं को दस्तावेजों में ‘मृत’ घोषित किया जा रहा है, ताकि उन्हें वोट देने से रोका जा सके। ममता बनर्जी ने लोगों से इस प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से कहा, “आपको मेरा साथ देने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन लोगों की मदद जरूर करें जो इस गलत प्रक्रिया के कारण मुश्किल में हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को अपनी नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए कतारों में खड़े होने को मजबूर किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि जब से राज्य में SIR की प्रक्रिया शुरू हुई है, डर और मानसिक तनाव के कारण अब तक लगभग 70 लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए कहा कि यदि लोगों के अधिकार छीने गए, तो जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। ममता ने भावुक होते हुए सवाल किया, “क्या किसी का दिल नहीं दुखता? अगर आपकी 85 वर्षीय मां को अपनी वैधता साबित करने के लिए एम्बुलेंस में घसीटकर मतदान केंद्र लाया जाए, तो दिल्ली के नेता क्या जवाब देंगे?” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब केवल ‘वॉट्सऐप’ के निर्देशों पर चल रहा है।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी ने कानूनी लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने घोषणा की कि वह इन मौतों और धांधली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी। अपनी कानूनी शिक्षा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वह एक वकील के तौर पर नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में अदालत से पैरवी करने की अनुमति मांगेंगी। ममता ने स्पष्ट किया, “मैं जनता की आवाज बनूंगी और उनके अधिकारों के लिए खुद अदालत में बहस करूंगी।” उनका कहना है कि यह केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है।
पार्टी स्तर पर भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस मामले में मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग की ‘मनमानी’ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में अपनाई जा रही SIR की प्रक्रिया पूरी तरह से दोषपूर्ण और प्रक्रियाओं के विरुद्ध है।
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