Mamata Banerjee Attack
Mamata Banerjee Attack: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया है। इस बार उनके निशाने पर वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इन-डेप्थ रिव्यू’ (SIR) की प्रक्रिया है। सोमवार को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) की एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए ममता ने न केवल इस प्रक्रिया की व्यवहारिकता पर सवाल उठाए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निजी और बेहद गंभीर आरोप भी मढ़ दिए।
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि आज के दौर में जो बर्थ सर्टिफिकेट मांगे जा रहे हैं, वे पुराने समय में संभव ही नहीं थे। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा, “मेरे माता-पिता का जन्म घर पर हुआ था, किसी अस्पताल में नहीं, इसलिए उनके पास कोई जन्म प्रमाण पत्र नहीं है।” इसी क्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर कटाक्ष करते हुए दावा किया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पास भी उनके माता-पिता के असली दस्तावेज नहीं होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने ‘नकली’ या ‘डुप्लीकेट’ सर्टिफिकेट बनवा लिए हैं। ममता ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे कागज बनवाना महज एक सेकंड का काम है।
मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया की खामियों को गिनाते हुए कहा कि 25-30 साल पहले भारत में अस्पतालों में जन्म लेने की दर बहुत कम थी। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर प्रसव घर पर ही होते थे, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। ममता ने इतिहास का हवाला देते हुए याद दिलाया कि राजीव गांधी के कार्यकाल में मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 साल की गई थी। उन्होंने सवाल किया कि जो लोग दशकों से मतदाता हैं, उनसे अब उनके पूर्वजों के दस्तावेज मांगना न्यायसंगत कैसे हो सकता है? उनके अनुसार, यह उन लोगों को प्रताड़ित करने की साजिश है जिनके पास संसाधनों का अभाव है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की सख्ती पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पते बदलने या नाम की स्पेलिंग में छोटी-मोटी मानवीय त्रुटियों के आधार पर वोटरों को लिस्ट से बाहर करना गलत है। उन्होंने उदाहरण दिया कि बंगाली और अंग्रेजी के उच्चारण के अंतर के कारण ‘A’ की जगह ‘E’ या ‘AA’ हो जाना एक आम बात है। एक गरीब फेरीवाला, दुकानदार या झुग्गी में रहने वाला व्यक्ति अंग्रेजी की इन बारीकियों को कैसे समझ सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि शादी के बाद लड़कियों का पता और सरनेम बदलना स्वाभाविक है, लेकिन इस आधार पर उन्हें वैध मतदाता की श्रेणी से हटाना अन्याय है।
राजनीतिक हमले के बीच ममता बनर्जी अपने चिर-परिचित मजाकिया और तीखे अंदाज में भी नजर आईं। प्रधानमंत्री पर निशाना साधने के बाद उन्होंने आगामी त्योहारों का जिक्र करते हुए कहा, “हम डुप्लीकेट सर्टिफिकेट नहीं बनाएंगे। क्रिसमस आ रहा है, हम उस मौके पर केक बनाएंगे। हम वह केक भी खाएंगे और भाजपा को भी पचा लेंगे।” उनका यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि वे बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता को चुनावी मैदान में डटकर चुनौती देने के लिए तैयार हैं।
ममता ने चेतावनी दी कि यदि दस्तावेजों के नाम पर आम और गरीब नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, तो यह लोकतंत्र का अपमान होगा। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हर बूथ पर सतर्क रहें और सुनिश्चित करें कि किसी भी वैध नागरिक का वोट न कटे। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख का मानना है कि SIR जैसी प्रक्रियाएं असल में सत्ताधारी दल के पक्ष में चुनावी समीकरणों को मोड़ने का एक गुप्त हथियार मात्र हैं।
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