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Mamata Banerjee: ममता बनर्जी का एकता संदेश, सांप्रदायिकता के खिलाफ युद्ध, बीजेपी को सीधी चेतावनी

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने ‘सॉलिडैरिटी डे’ (Solidarity Day) के अवसर पर एक बार फिर सांप्रदायिक सद्भाव और एकता का मजबूत संदेश दिया है। उन्होंने अपने X (पहले ट्विटर) हैंडल पर गरजते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक पार्टियाँ राज्य में सांप्रदायिक अशांति फैलाने की लगातार कोशिश कर रही हैं और उनके खिलाफ यह लड़ाई जारी रहेगी। मुख्यमंत्री का यह बयान 6 दिसंबर 1992 को हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर आया है, जिसे तृणमूल कांग्रेस हर साल सॉलिडैरिटी डे के रूप में मनाती है।

Mamata Banerjee: ‘बंगाल की मिट्टी ने कभी बंटवारे के आगे सिर नहीं झुकाया’

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक और सशक्त पोस्ट साझा करते हुए बंगाल की समावेशी संस्कृति पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, “बंगाल की मिट्टी एकता की मिट्टी है। यह मिट्टी रवींद्रनाथ की मिट्टी है, नज़रुल की मिट्टी है, रामकृष्ण-विवेकानंद की मिट्टी है—इस मिट्टी ने कभी बंटवारे के आगे सिर नहीं झुकाया है, और भविष्य में भी नहीं झुकाएगी।”उन्होंने राज्य में भाईचारे को रेखांकित करते हुए आगे कहा, “हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध—बंगाल में हम सब कंधे से कंधा मिलाकर चलना जानते हैं। हम खुशियां बांटते हैं।”

Mamata Banerjee: ‘धर्म सबका है, त्योहार सबके लिए हैं’

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में सांप्रदायिक ताकतों को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने अपने धर्मनिरपेक्ष विचार को दोहराते हुए कहा, “हमारा मानना ​​है कि धर्म सबका है, लेकिन त्योहार सबके लिए हैं।”

उन्होंने सांप्रदायिकता फैलाने वालों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “जो लोग कम्युनलिज्म की आग जलाकर देश को बर्बाद करने का खेल खेल रहे हैं, उनके खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। सब लोग शांति और भाईचारा बनाए रखें।” ममता बनर्जी का यह संदेश स्पष्ट रूप से उन राजनीतिक ताकतों की ओर इशारा करता है, जिन पर तृणमूल राज्य में धार्मिक ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाती रही है।

अभिषेक बनर्जी ने भी दिया एकता का संदेश

ममता बनर्जी के बाद, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी इस महत्वपूर्ण इवेंट का पोस्टर सोशल मीडिया पर साझा किया और लोगों को एकजुटता का संदेश दिया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा साझा किए गए इन संदेशों से यह साफ होता है कि TMC 6 दिसंबर के दिन को सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ अपनी मजबूत वैचारिक लड़ाई के तौर पर देखती है।

हर साल मनाया जाता है ‘सॉलिडैरिटी डे’

यह उल्लेखनीय है कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के एक साल बाद से ही ममता बनर्जी के निर्देश पर तृणमूल कांग्रेस हर साल इस तारीख को सॉलिडैरिटी डे के रूप में मनाती आ रही है।

इस वर्ष, तृणमूल के स्टूडेंट और यूथ ऑर्गनाइजेशन को कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य प्रभार सौंपा गया है। शनिवार दोपहर को होने वाली इस महत्वपूर्ण मीटिंग में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ अलग-अलग समुदायों के धार्मिक नेता और प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे, जो विभिन्न धर्मों के बीच सौहार्द को प्रदर्शित करेगा।

कार्यक्रम की व्यापक तैयारियां और राजनीतिक निहितार्थ

कार्यक्रम के संगठन और प्रशासन की तरफ से सभी तैयारियाँ पहले ही पूरी कर ली गई हैं। कोलकाता, 24 परगना और हावड़ा जैसे प्रमुख जिलों से स्टूडेंट्स और यूथ को इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विशेष रूप से बुलाया गया है।बुधवार शाम को वैश्वानर चटर्जी, सार्थक बनर्जी, और त्रिनंकुर भट्टाचार्य जैसे युवा नेताओं ने मीटिंग की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी।

तृणमूल कांग्रेस पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आगामी असेंबली इलेक्शन से पहले अल्पसंख्यकों (Minorities) को निशाना बनाकर राज्य में अशांति का माहौल बनाने की कोशिश करने का आरोप लगा चुकी है। ऐसे में, इस बड़ी सभा में मुख्यमंत्री के भाषण पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि यह आगामी चुनावों से पहले TMC की सांप्रदायिक सद्भाव और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ उसकी रणनीति को साफ तौर पर दर्शाएगा।

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